कहानी

Ghazal | कहानी

कहानी

( Kahani )

 

कल एक कहानी लिखुंगा

मैं तेरे प्यार की

इक निशानी लिखुंगा

जो तूने दिया था बचपन में

मैं तेरी वो रवानी लिखुंगा

कल एक कहानी लिखुंगा

मैं तेरे प्यार की

इक निशानी लिखुंगा

 

वो गलियां थी

तू गुड़िया थी

मैं तेरा गुड्डा बना था जहां

खेले और लड़े हम

उस रूठने मनानी की

मैं तेरे प्यार की

इक निशानी लिखुंगा

कल एक कहानी लिखुंगा

 

प्यार बांधा था

संसार बांधा था

सुख दुःख के मिलन पर

बिछुड़े साथी जो बने थे

उन राहों पे चल कर

वो बालापन से जवानी की

इक निशानी लिखुंगा

कल एक कहानी लिखुंगा

 

तू आयेगी

मिलन के गीत लायेगी

प्यासे सावन की

आंखों में बहार  आयेगी

वो जानी मानी जिंदगानी की

मैं तेरी मेरी फिर से

इक नयी कहानी लिखुंगा

?

कवि : राजेश गोसाईं

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