आँखों में डूब जाने को | Aankhon mein Doob Jaane ko

आँखों में डूब जाने को

( Aankhon mein doob jaane ko ) 

 

वो बेक़रार हैं ख़ुद राज़े-दिल बताने को
सजा रहे हैं बड़े दिल से आशियाने को

मिला है साथ हमें तेरा जब से ऐ हमदम
बढ़ा दिये हैं क़दम आसमां झुकाने को

तुम्हारा फूल सा चेहरा रहे खिला हरदम
मैं तोड़ लाऊँ सितारे तुम्हें हँसाने को

ये किस ख़याल में इतना यक़ीन है मुझ पर
हमेशा मुझ को ही चुनते हो आज़माने को

ये मिलना जुलना हमेशा ही इत्तिफ़ाक़ नहीं
वो ढूँढ लेता है हर दिन नये बहाने को

बहार आई तो सब कुछ लुटा दिया उस पर
बचा ही क्या है मेरे पास मुस्कुराने को

जो तुमने साज़े-मुहब्बत पे गुनगुनाया था
सुना रहा हूँ वही गीत अब ज़माने को

ये ज़ोर कैसा तमन्ना उठा रही सागर
किसी की झील सी आँखों में डूब जाने को

 

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

https://thesahitya.com/muhabbat-shayari-in-hindi/

Similar Posts

  • काम कोई दुआ नहीं आई

    काम कोई दुआ नहीं आई वक़्त पर जब दवा नहीं आईकाम कोई दुआ नहीं आई मुझको गूंगी लगी ये दुनिया फिरएक आवाज़ क्या नहीं आई कितना फूटा हौआ है भाग मेरावो गया और क़ज़ा नहीं आई झूट बोलो तो झूट सच ही लगेएक बस ये अदा नहीं आई फ़ायदा कुछ नहीं मिला मुझकोबेवफ़ा को वफ़ा…

  • चर्चा तेरी गली का | Charcha Teri Gali Ka

    चर्चा तेरी गली का ( Charcha Teri Gali Ka ) मुझ से ही चल रहा है चर्चा तेरी गली का कैसा महक रहा है रिश्ता तेरी गली का जब ख़ुद को भूलना भी आसान हो गया फिर क्यों याद आ रहा था नक़्शा तेरी गली का अब सारा शहर जिसकी लपटों में जल रहा है…

  • छुपा कर रक्खें

    छुपा कर रक्खें हो न जाए कहीं रुसवाई छुपा कर रक्खेंइन अमीरों से शनासाई छुपा कर रक्खें फ़ायदा कुछ नहीं चतुराई छुपा कर रक्खेंमूर्ख के सामने दानाई छुपा कर रक्खें कौन करता है यक़ीं आपकी इन बातों परइसलिए अपनी ये सच्चाई छुपा कर रक्खें लालची कोई भ्रमर इसको चुरा ले न कहींफूल कलियाँ सभी अँगड़ाई…

  • अजनबी बन के | Ajnabi Ban ke

    अजनबी बन के ( Ajnabi ban ke ) शाइरी तेरी लगे मख़मली कोंपल की तरहकूकती बज़्म में दिन रात ये कोयल की तरह अजनबी बन के चुराई है नज़र जब वो मिलेमुझको उम्मीद थी लगते वो गले कल की तरह ख्वाहिशें दफ़्न हैं साज़िश है बदनसीबी भीज़ीस्त वीरान हुई आज है मक़्तल की तरह मुस्तक़िल…

  • ग़ज़ल सम्राट विनय साग़र जी

    विनय साग़र जी वही उस्ताद हैं मेरे ग़ज़ल लेखक विनय साग़रजिन्हें है जानती दुनिया ग़ज़ल सम्राट साग़र जी हमारी भी ग़ज़ल की तो करें इस्लाह साग़र जीउसी पथ पर सदा चलता करें जो चाह साग़र जी बड़ा अनभिज्ञ हूँ मैं है नहीं कुछ ज्ञान भी मुझकोमगर हर पथ की बतलाते मुझे हैं थाह साग़र जी…

  • गर दो इजाजत | Gar do Ijazat

    गर दो इजाजत ( Gar do Ijazat )   गर दो इजाजत तुम पर मर जाऊं, शब्द बनके स्याही में उतर जाऊं ! गुनगुना सको जिसको महफ़िल में, ऐसी कविता बन के मैं संवर जाऊं ! मेरा मुझ में कुछ भी ना रहे बाकी, कतरा-कतरा तुझ में बिखर जाऊं ! दिल-ऐ-समंदर में डूबकर फिर मैं,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *