Ab ke Mausam

अब के मौसम | Ab ke Mausam

अब के मौसम

( Ab ke mausam )

अब  के  मौसम जो प्यार का आया
तुम  पे  फिर दिल बहार का आया

वक़्त   फिर  आर-पार  का  आया
मसअला  जब   दिवार  का  आया

मुब्तिला   थी   मैं  याद   में उसकी
जब   इशारा   मुशार    का  आया

पेशवाई    करो   जहां    की    तुम
इज़्न    फिर   ताजदार  का  आया

ये   सबा   कह   रही  है  कानों  में
ख़त    कोई   तेरे   यार  का  आया

मैं  भी खिलने  लगी गुल ए तर सी
वक़्त  मेरे  निखार  का  आया

हिज़्र   की   रात  आ   गयी “मीना”
वक़्त   फिर  इन्तिज़ार  का   आया

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

उसके इज़हार पे | Uske Izahaar Pe

Similar Posts

  • मस्तियों में जी मैंने

    मस्तियों में जी मैंने शराबे – शौक़ निगाहों से उसकी पी मैंनेतमाम उम्र बड़ी मस्तियों में जी मैंने हज़ारों किस्म की चीज़ों से घर सजाया थातुम्हारे शौक़ में रख्खी नहीं कमी मैंने जुनून ऐसा चढ़ा था किसी को पाने कालगाई दाँव पे हर बार ज़िन्दगी मैंने हज़ारों ग़म थे खड़े ज़िन्दगी की गलियों मेंहरेक मोड़…

  • सताया न कर | Sataya na Kar

    सताया न कर ( Sataya na Kar )   ज़ब्त रब का कभी आज़माया न कर बेवज़ह मुफ़लिसों को सताया न कर। है खफ़ा तो पता ये उसे भी लगे ख़ुद ब ख़ुद आदतन मान जाया न कर। रंजिशें दरगुज़र भी किया कर कभी तल्ख़ियां बेसबब यूं बढ़ाया न कर। तोड़ कर ख़्वाब ग़र तू…

  • लम्हा भर है जिंदगी | Zindagi pe Shayari

    लम्हा भर है जिंदगी ( Lamha bhar hai zindagi )    सबसे तू हँस बोल ले प्यारी भवर है जिंदगी साँस के बस एक झोंके का सफ़र है जिंदगी जिंदगी जी ले जी भर मत सोच ज्यादा अब इसे क्या पता वर्षों की है या लम्हा भर है जिंदगी खोज ले पल हसरतों के कुछ…

  • बदले की कहानी किसलिए

    बदले की कहानी किसलिए ( Badle ki Kahani Kisliye ) वक़्त दुहराता है बदले की कहानी किसलिएदिल दुखायें जो वो बातें दिल में लानी किसलिए ज़ुल्म ढ़ाकर मेरे दिल पर रो रहे हैं आप क्यों,मेरे बंजर दिल पे आख़िर मेहरबानी किसलिये । जब मुकम्मल ही नहीं होने ये किस्से इश्क़ केफिर शुरू मैं भी करूँ…

  • सीमा पाण्डेय ‘नयन’ की ग़ज़लें | Seema Pandey Nayan Poetry

    नई आदत लगा ली है वहम की आजकल उसने नई आदत लगा ली है,कोई हो वाकया शक की नज़र मुझ पर ही डाली है। यहां सौ सौ बखेड़े जान को मसरूफ़ियत इतनीनहीं फुरसत तुम्हें तो ये बताओ कौन खाली है। बढ़ी है बात तो कुछ तो तुम्हारी भी ख़ता होगी,कभी बजती नहीं इक हाथ से…

  • ये दुखदाई है | Ghazal Ye Dukhdai Hai

    ये दुखदाई है ( Ye Dukhdai Hai )   आसमां छूती मेरे मुल्क़ में मँहगाई है मुफ़लिसों के लिए अब दौर ये दुखदाई है सींचते ख़ून पसीने से वो खेती अपनी उन किसानों के भले पाँव में बेवाई है साँस लेना हुआ दुश्वार तेरी दुनिया में अब तो पैसों में यहाँ बिक रही पुरवाई है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *