अब लौट भी आओ

दिकु, अब लौट भी आओ

दिकु, अब लौट भी आओ

तू दूर गई तो साँसें भी रूठ गई हैं,
आँखों की दुनिया वीरान होकर छूट गई हैं।
तेरे बिना ये दिल बेज़ार सा है,
हर लम्हा मेरा जैसे अंधकार सा है।

हवा से कहूँ या बादलों से बोलूँ,
तेरी यादों का किस्सा, मैं किस किस से तोलूँ?
राहों में बैठा तेरा इंतज़ार करता हूँ,
तू लौट आए, बस यही अरदास करता हूँ।

क्यों ख़ुद को रोक लिया है तूने?
अपने ही दिल को क्यों बाँध लिया है तूने?
हर धड़कन में गूँजती है जो मेरी सदा,
क्या उसे भी मिटा देगी तू एक दफ़ा?

ना शिकवा कोई, ना ही कोई गिला है,
बस एक चाहत—
तू अगर लौट आए, तो सारा जहाँ मिला है।

तेरे बिना ये दुनिया अधूरी लगती है,
हर लफ़्ज़ में जैसे मेरी मजबूरी बसती है।

दिकु, अब और ना सज़ा दे मुझे,
बस एक बार अपने पास बुला ले मुझे।
तेरी बाहों में ही मेरा जहाँ है,
तेरे बिना ये जीवन जैसे ज़हर बना है।
तेरे बिना ये जीवन जैसे ज़हर बना है।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • रख | Kavita

    रख ( Rakh : Hindi Kavita  )   खुशियो भरा पिटारा रख । दिल मे जज्बा प्यारा रख ।। तुझे अकेले चलना है । आगे एक सितारा रख ।। मन मे हो मझधार अगर । अपने साथ किनारा रख ।। धुन्धले पन के भी अंदर । सुंदर एक नजारा रख ।। दुनिया से जो भिड़ना…

  • जल संरक्षण | Poem jal sanrakshan

    जल संरक्षण ( Jal sanrakshan )   सोचल्यो समझल्यो थोड़ा हिवड़ा म ध्यारल्यो पाणी घणों मान राखै मन म बिचारल्यो   मोतिड़ा सा दमकै ज्याणी पाणी री आब ज्यूं सांसा री डोर संभळै पाणीड़ा री धार सूं   सूखरया तळाब कुआं लूंवा चालै बारनै पाणीड़ो बचाणो भाया जमाना र कारणै   ठण्डों ठण्डो पाणी मिलज्या…

  • क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in Hindi

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी ( Kya chahti ho sundar nari )   क्या चाहती हो सुंदर नारी विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम राग प्रीत की मूरत हो जग को जीवन देने वाली क्यूं पीले पात सुखी आशा दामन में अपने रखती हो क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर हर पल आगे तुम बढ़तीहो क्यूँ…

  • जागते रहो | Jagte Raho

    जागते रहो ( Jagte raho )    ये जागने के दिन हैं जागते रहो… दिन रात भागते रहो ठहरो न पल भर के लिए भी क्या पता उस पल ही कोई कर जाए छल संग तेरे डाल दे डेरा अपना घर तेरे! देख रहे हो देश दुनिया में क्या क्या हो रहा है? मनुज बन…

  • हे ईश्वर क्या तेरी माया | Poem hey ishwar kya teri maya

    हे ईश्वर क्या तेरी माया ( Hey ishwar kya teri maya )   हे ईश्वर क्या तेरी माया कहीं धूप कहीं पर छाया लीला अपरंपार प्रभु तेरा खेल समझ ना आया कहीं आंधी कहीं वर्षा खुशियों भरा मधुमास हरसा बाद कहीं सूखा मिलता बिन पानी के प्यासा तरसा झरनों से जल बरसाया पहाड़ों पर चमन…

  • पहाड़ी रचना | सुदेश दीक्षित

    माह्णुआं दी पछैण जे करनी माह्णुआं दी पछैणतां न्यारिया वत्ता हंडणा सिख।जे पाणा तें आदर मान सारे यां ते।ता लोकां दा सुख दुःख वंडणा सिख।खरे खोटे मितरे बैरिये दा पता नि चलदा।सुप्पे साही फटाकेयां देई छंडणा सिख। ईह्यां नि जवानी ते जैह्र बुऴकणा।मोका दिक्खी सर्पे साहि डंगणा सिख। रूड़दे माह्णुए जो नि कोई बचांदा।डूब्बी तैरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *