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शिव पथ

शिव पथ

शिव पथ अतृप्ति का ऐसा
सुखद मार्ग है जिसमें
अभोग ,त्याग , आस्था
आदि सहायक होते है ।
रोटी खाई, भूख बुझी नहीं ।
पानी पिया, प्यास बुझी नहीं ।
धन का अर्जन किया ,
लालसा बुझी नहीं आदि
क्योंकि इस क्षणिक तृप्ति
के पीछे अतृप्ति का
विशाल सुखद साम्राज्य है
जिससे प्यास बुझे कैसे?
यह एक अबूझ पहेली है ।
पदार्थ का भोग तृप्ति
का आभास देता है और
भीतर ही भीतर उसे पोषण देता है ।
वह मन को स्थिर नहीं रहने देता है ।
यह ध्रुव सत्य है कि
पदार्थ के भोग द्वारा
कभी भी सही से हमको
तृप्ति नहीं हो सकती है ।
अतः शिव पथ से ही मोक्ष
का हम वरण कर सकते है ।
यही हमारे लिए काम्य है ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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