Shiva ka darbar

महाशिवरात्रि की प्रार्थना

महाशिवरात्रि की प्रार्थना

हे महादेव, त्रिलोक के नाथ,
आप हरते हैं हर भक्त का त्रास।
सुनो मेरी भी करुण पुकार,
लौटा दो दिकु को इस बार।

जैसे मां पार्वती ने की तपस्या महान,
सह लिया हर कठिन तूफ़ान।
वैसे ही मेरा प्रेम है अडिग खड़ा,
अब भी उसकी राह में है दीप जला।

हे भोलेनाथ, कृपा बरसाओ,
इस प्रेम की डोरी को फिर से बंधाओ।
जो अधूरी कहानी रह गई थी,
उसे पूर्णता का आशीष दिलाओ।

तेरे चरणों में अर्पण है मेरी प्रीत,
हर पल मन में गूंजे केवल तेरा ही गीत।
कर दो मेरा कठिन जीवन सफल,
मुझे दिकु का संग मिले हर पल।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • साईबर ठगों का आतंक | Cyber Thagi

    साईबर ठगों का आतंक ( Cyber thagon ka aatank )    आज बढ़ रहा है तीव्रता से साईबर ठगों का आतंक, अपने-आपको समझ रहें है वह सभी से बड़े दबंग। फैला रहें है जो जाल धनाधन ऐसे अनेकों है शैतान, जाल झूठ छल-कपट हेरा फेरी से कर देते है दंग।। करते है मोबाइल सिम बदलकर…

  • देवोत्थान एकादशी | Devotthan Ekadashi Kavita

    देवोत्थान एकादशी ( Devotthan Ekadashi )   शुभ-मांगलिक कार्यों की हो जाती है शुरूआत, योगनिद्रा को त्याग देते इसदिन विष्णु भगवान। देवउठनी एकादशी नाम से जो है यह विख्यात, धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन है महान।।   कहते चतुर्मास पश्चात उठते है श्री हरि भगवान, देवोत्थान प्रबोधिनी उत्थान एकादशी यह नाम। शादी विवाह मुण्डन…

  • चुनाव

    चुनाव सही व्यक्ति को – – – – – – ज्यों ज्यों चुनाव आ रहे हैं।नेताजी लाड़ जता रहे हैं। जातिवाद की दुहाई दे रहे ।खुद चरित्र की सफाई दे रहे । वाणी में मधु घुल गया है।ओठों पै गुलाब खिल गया है। दुखती रगें पहचानते हैं।कैसे संतुष्ट करें जानते हैं ? मर्यादाऐं तोड़ रहे…

  • ओज भरी हुंकार | Kavita oj bhari hunkar

    ओज भरी हुंकार ( Oj bhari hunkar )   मैंने लिखे गीत तराने मधुर मधुर मुस्कान लिए। अंतर्मन भाव सुहावने भारत मां की शान लिए।   राष्ट्रदीप ले स्वाभिमान के भाव सजाया करता हूं। मन मंदिर में दिव्य प्रेम के दीप जलाया करता हूं।   मैं कविता की हूंकारों से गीत वतन के गाता हूं।…

  • बच्चों का बचपन | Bacchon ka Bachpan

    बच्चों का बचपन ( Bacchon ka bachpan ) ( 2 ) किस ओर जा रहे हैं बच्चे धकेल रहे हैं अंधविश्वास और अंधभक्ति की तरफ क्यों छिन रहे हो उनका बचपन क्यों काट रहे हो उनके पंख उड़ने दो हिंसकवादी ना बनाओं धर्म का प्रचार ना करवाओ बच्चों में नफ़रत ना भरो अभी वो खाली…

  • जब उनसे मुलाकात हुई | Geet

    जब उनसे मुलाकात हुई ( Jab unse mulaqat hui )   खिल गई मन की बगिया मधुर सुहानी रात हुई महक उठा दिल का चमन जब उनसे मुलाकात हुई   साज सारे थिरक उठते मधुर वीणा के तार बजे होठों पर सुर मुरली के मधुर हंसी चेहरे पे सजे गीतों की मोहक बहारें संगीत की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *