Ada ke Naam Pe

अदा के नाम पे | Ada ke Naam Pe

अदा के नाम पे

( Ada ke Naam Pe )

अदा के नाम पे ये बेहिसाब बेचते हैं
कि हुस्न वाले खुलेआम ख़्वाब बेचते हैं

जिन्हें शऊर नही है बू ओर रंगत का
वो काग़ज़ों के यहाँ पर गुलाब बेचते हैं

अमीर लोगो की फितना परस्ती तो देखो
जला के घर वो ग़रीबों का आब बेचते हैं

मुहब्बतों के जो हामी हैं इस लिए लोगो
मुहब्बतों की मुक़द्दस क़िताब बेचते हैं

रियासतें न रहीं शान अब न पहले सी
कि शर्म सारी ही बिगड़े नवाब बेचते हैं

बड़े हैं झूठे फ़रेबी न एतबार करो
ज़मी तो बेच चुके माहताब बेचते है

नज़र लगे न कहीं शायरी को ऐ मीना
कि शेर सारे ही वो लाजवाब बेचते हैं

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • यह हा़ल है हमारा | Ye Haal Hai Hamara

    यह हा़ल है हमारा ( Ye Haal Hai Hamara ) यह हा़ल है हमारा मुरव्वत के बाद भी।तन्हा खड़े हैं सबसे मुह़ब्बत के बाद भी। अल्लाह जाने किसकी लगी है नज़र हमें।अफ़सुर्दगी है रुख़ पे मुसर्रत के बाद भी। रह-रह के उनकी याद सताती है इस क़दर।आती नहीं है नींद मशक्कत के बाद भी। लाया…

  • तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई | Ghazal Lines in Hindi

    तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई ( Tayashuda kagazon par bayani hui )   तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई हम ग़रीबों की क्या ज़िंदगानी हुई एक पागल ने खोले थे दिल के वरक़ सारी दुनिया मगर पानी-पानी हुई तेरी आँखों में अब भी है रंग-ए-हिना इतनी संजीदा कैसे कहानी हुई उनसे मिलते ही इतने दिये जल…

  • यह कहानी फिर सही | Phir Sahi

    यह कहानी फिर सही ( Yeh kahani phir sahi )    हमने कब किसको पुकारा यह कहानी फिर सही किसको होगा यह गवारा यह कहानी फिर सही आबरू जायेगी कितनों की तुम्हें मालूम क्या किसने किसका हक़ है मारा यह कहानी फिर सही रिश्तों को मीज़ान पर लाकर के जब रख ही दिया क्या रहा…

  • ताजदार करना है

    ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने कीअभी…

  • बिठाये पहरे हैं | Bithaye Pahre Hain

    बिठाये पहरे हैं ( Bithaye Pahre Hain ) दर पे मुर्शिद बिठाये पहरे हैंइन के सर पर भी अब तो ख़तरे हैं दाग़ दामन पे लाख हों इनकेफिर भी उजले सभी से चेहरे हैं जब्र करता है इसलिए जाबिरलोग गूंगे हैं और बहरे हैं तुम भी दिल में हमारे बस जाओइसमें कितने ही लोग ठहरे…

  • मेरे आस पास में | Mere aas Paas me

    मेरे आस पास में ( Mere aas paas me )    कोई नादान हो रहा है मेरे आस पास में, उम्मीदों को बो रहा है मेरे आस पास में। बारिशों से कहिए कि पूरा झूम के बरसें, कोई ख़्वाब धो रहा है मेरे आस पास में। वो ज़माने भर के सैंकड़ों भंडार छोड़ के, हसरतों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *