Krishna Kavita Hindi

ऐसा एक दिन आएगा

ऐसा एक दिन आएगा

गोकुल में जन्म लेंगे कान्हा
कारागार पछताएगा
ऐसा एक दिन आएगा

इस देश की तरह पुण्य मय होगी
राम होंगे हृदय में मन कान्हा हो जाएगा
ऐसा एक दिन आएगा

न्याय के लिए ना भगाना होगा
गरीब अमीर सबको बराबर इलाज मिल जाएगा
ऐसा एक दिन आएगा
हां ऐसा एक दिन आएगा

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • आम | Aam kavita

    आम ( Aam )   खाओ ताजा-ताजा आम कहते फलों का राजा आम। कुछ कच्चा कुछ पक्का आम कुछ खट्टा कुछ मीठा आम।। बागों में जब बौरे आम कोयल बोले सुबह और शाम । देख टिकोरा तोड़े छोरा भूल के घर का सारा काम।। लंगड़ा चौसा और दशहरी ना जाने हैं कितने नाम । बने…

  • विजयादशमी | Vijayadashami Kavita

    विजयादशमी ( Vijayadashami kavita ) ( 10 )    जागो रावण आए साल तूझे यूं खामोशी से जलता देख हे रावण,मुझे तो तुझ से इश्क़ हो चला है कभी तो पूछ उस खुदा से, क्या इन्साफ है तेरा मरने के बाद भी ,सदियों ज़माना क्यूं सज़ा देता चला है सोने की लंका थी मेरी ,शिव…

  • राम आएंगे धरा पर | Ram Aaenge Dhara Par

    राम आएंगे धरा पर ( Ram aaenge dhara par )   राम आएंगे धरा पर, सब राम के गुणगान गाओ। भगवा धर्म ध्वज हाथ ले, नभ पताका लहराओ। चलो अवध रामभक्तों, दर्श को पलके बिछाओ। दिव्य राम मंदिर पावन, भारतवासी सारे आओ। राम का कीर्तन करो, राम की महिमा सुनाओ। आराध्य श्री रामजी, श्रद्धा से…

  • स्व. अटल बिहारी वाजपेयी

    स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ( late Atal Bihari Vajpayee )     मुल्क में होगा अटल जैसा न नेता कोई देखिए ए लोगो मुहब्बत एकता से ही भरा   नाम जिसका ही जहां में है सारे  रोशन लोगों सच कहूँ मैं मुल्क का है रहनुमा लोगों अटल   हर किसी को ही दिया है हक वतन…

  • रिद्धि-सिद्धि के दातार | Riddhi-Siddhi ke Datar

    रिद्धि-सिद्धि के दातार ( Riddhi-Siddhi ke datar )    हर कार्य प्रारम्भ करतें बाबा हम लेकर आपका नाम, दीप जलाकर पुष्प चढ़ाकर शुरु करतें अपना काम। भोग लड़वन का लगातें आपके गजानंद सवेरे शाम, बुद्धि कौशल के देवता आपकों कोटि-कोटि प्रणाम।। शादी हो या कोई उद्धघाटन मुंडन अथवा गृह प्रवेश, सिद्धविनायक मंगलमूर्ति शुभम हर-लेते हो…

  • राह-ए-इश्क | Poem Rah-E-Ishq

    राह-ए-इश्क ( Rah-E-Ishq )    उसकी पलकों के ओट से हया टपकती है, फिर भी देखो वो मौज-ए-बहार रखती है। दाना चुगने वाले उड़ते रहते हैं परिन्दे, क्या करे वो बेचारी तीर-कमान रखती है। शाही घरानों से नहीं हैं ताल्लुकात उसके, आसमां कीे छोड़, जमीं भी महकती है। दोष उसका नहीं, ये दोष है जवानी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *