Tajurba

तजुर्बा | Tajurba

तजुर्बा

( Tajurba )

 

अदना सी बात भी
चुभ जाए अगर दिल मे
तो बन जाती है आंख की किरकिरी
प्रयासों के बाद भी वह निर्मलता नही आती…

शब्द मे भी होती है कठोरता पत्थर सी
शब्द से पिघल जाते हैं पत्थर दिल भी
शब्द जोड़ देते हैं टूटते संबंधों को
शब्द बढ़ा देते हैं दूरियां ,साथ रहकर भी…

रहें तनहा तो रखें विचार मर्यादित
समूह मे वाणी को लगाम दें
व्यक्त हो जाते हैं भाव सहज ही मन के
सफाई से हर बात साफ नही होती….

ख्याल रखें बेशक अपनों का
अपनों से अधिक उनके मर्तबे का
हासिल होती हों कामयाबियां लाख लेकिन
महत्व उससे भी अधिक है तजुर्बे का….

स्वयं के स्वाभिमान पर प्रहार
हर किसी को सहन नही होता
लाख के हों एहसान आपके उसपर
बेचकर ज़मीर रहना नही होता …..

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

जड़ें | Jaden

Similar Posts

  • मेरी कहानी में तुम

    मेरी कहानी में तुम पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी। कभी कोई बात,कभी कोई लम्हा,तो कभी वो खामोशियाँ,जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं। मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,अधूरे ख्वाब थे,अधूरी बातें थीं,और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं…

  • समय | Samay par Kavita

    समय ( Samay )    मूल्यवान है समय की कीमत  इसको    व्यर्थ   गवाओं   ना    समय  समय पर डोले धरती  समय  पर  सूरज  चांद  उगे   समय  समय  पर चले हवाएं   समय  पर   सुंदर  नाद  लगे,   कर सदुपयोग कर्म कर अपना पीछे      पैर     हटाओ    ना।   पेड़   समय  पर  फल  देता  है समय  …

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय | Pt. Deendayal Upadhyay

    पं. दीनदयाल उपाध्याय ( Pt. Deendayal Upadhyay )    वो महान विचारक राजनेता एवं समाज-सुधारक थें, भारतीय जनसंघ पार्टी बनानें में योगदान वे दिए थें। काॅलेज समय में राजनीति का निर्णय वो ले लिए थें, कई-उपलब्धियां कम समय में वे हासिल किए थें।। पं. दीनदयाल उपाध्याय था उस महापुरुष का नाम, कभी पत्रकार के रुप…

  • गुरु की महिमा ( दोहे ) | Guru ki mahima

    गुरु की महिमा ( दोहे ) ***** १. गुरु चरणन की धुलि,सदा रखो सिरमौर आफत बिपत नाहिं कभी,आवैगी तेरी ओर। २. गुरु ज्ञान की होवें गंगा,गोता लगा हो चंगा बिन ज्ञान वस्त्रधारी भी,दिखता अक्सर नंगा। ३. गुरु की वाणी अमृत, वचन उनके अनमोल स्मरण रखो सदा उन्हें,जग जीतो ऐसे बोल। ४. गुरु की तुलना ना…

  • हाॅं हम है ये आदिवासी | Adivasi

    हाॅं हम है ये आदिवासी ( Han hum hai adivasi )    हाॅं हम है ये आदिवासी, खा लेते है रोटी ठंडी-बासी। रखतें हाथों में तीर-कमान लाठी, क्यों कि हम है इन वनों के ही वासी।। हाॅं हम है ये आदिवासी, बोड़ो भील कहते है सांसी। मर जाते, मार देते जो करें घाती, जंगल, ज़मीं…

  • जलाओ न दुनिया को | Jalao na Duniya Ko

    जलाओ न दुनिया को ! ( Jalao na duniya ko )   मोहब्बत की दुनिया बसा करके देखो, हाथ से हाथ तू मिला करके देखो। सूखे पत्ते के जैसे न जलाओ जहां को, नफ़रत का परदा हटा करके देखो। गिराओ न मिसाइलें इस कदर गगन से, उजड़ते जहां को बसा करके देखो। अमन -शान्ति से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *