अपनी दुनियां | Apni Duniya
अपनी दुनियां
इस दुनिया के भीतर भी अपनी एक दुनिया होनी चाहिए
मन के राज वहीं पर खोलना चाहिए
इस दुनिया में जिसकी अपनी नहीं होती एक दुनिया
वह विचरता रहता है भ्रम और जाल में
दुखी होता रहता है संसार के अंदर
लेकिन जिसके भीतर अपनी एक दुनिया होती है
वह सदा मस्त रहता है अपने ही भावों में
अपने ही लक्ष्य को पाने में उसे स्वयं में आनंद की अनुभूति होती है
क्योंकि वह एक अपनी अलग दुनिया में विचरते हुए
इस संसार के साथ रहता है और उसका इस संसार में रहना आसान सा हो जाता है
क्योंकि जब हम अपनी दुनिया में रहते हैं
तो वही सच्चे आनंद की अनुभूति होती है
और वह दुनिया स्वयं की स्वयं की भीतर है
स्वयं से बातें करें स्वयं को पहचाने
स्वयं शांति का अनुभव करें गीत संगीत भजन मनन चिंतन स्वास्थ्य वहीं से है
वही तो हमारी ही लौकिक और परलोक की यात्रा का हमें आनंद देता है।
स्वयं का मन ही है स्वयं की दुनियां

ऋतु गर्ग
सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल
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