Shyam Base Ghat Ghat

श्याम बसे घट घट | Shyam Base Ghat Ghat

श्याम बसे घट घट

( Shyam base ghat ghat ) 

 

हरिहरण घनाक्षरी

 

रामजी बसा लो घट, श्याम बसे घट घट।
पणिहारी पनघट, भर लाई नीर घट।

भोर भई निशा घट, प्रेम रहा उर घट।
राम बसे जब घट, पाप सारा जाए घट।

सर तीर भर घट, छलकत अध घट।
जला दीप घट घट, ज्ञान भर हर घट।

तृष्णा सारी जाए घट, प्रेम बरसाए घट।
हर्ष मौज छाए घट, भाव नव आए घट।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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