कुर्सी की लड़ाई

कुर्सी की लड़ाई | Political Kavita

कुर्सी की लड़ाई

( Kursi ki ladai )

 

बड़े-बड़े दिग्गज उतरेंगे, महासमर चुनाव में।
कुर्सी की खातिर नेताजी, होंगे खड़े कतार में।

 

राजनीति की सेंके रोटियां, सत्ता के गलियारों में।
वोटों का बाजार गर्म हो, वादों की भरमारों से।

 

कुर्सी की लड़ाई में फिर, उठा पटक जारी होगी।
शह मात का खेल चलेगा, सतरंजी तैयारी होगी।

 

कुर्सी के लोभी नेताजी, साम दाम अपनाते हैं।
कहीं मोहरे काम करे, कहीं प्यादे पिट जाते हैं।

 

राजनीति की गलियों में, सर्प आस्तीन पलते देखे।
कुर्सी की लड़ाई ऐसी, विपक्ष आग उगलते देखें।

 

प्रलोभन गठबंधन भी, सभी पार्टियों में चलता है।
राज में पासा अपना हो, लोभ कुर्सी का पलता है।

 

जुलूस धरना प्रदर्शन, कुर्सी का चक्कर होता है।
आमसभा संबोधन भारी, प्रचार लक्ष्य सत्ता है।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

झोपड़ी में बसते हैं भगवान | Kavita

Similar Posts

  • मकरसंक्रांति का उल्लास

    मकरसंक्रांति का उल्लास सोचा था इस बार तेरे संग पतंग उड़ाऊं,तेरे हाथों से डोर थाम, सपनों को आसमान में ले जाऊं।आसमान संग हमारी खुशी को मैं जीता जाऊं,तेरे साथ हर पल को मैं सजीव बनाऊं। सूरज की किरणों में तेरी मुस्कान को पाऊं,तेरी हंसी की मिठास से, मैं दिन को सजाऊं।दिल की रोशनी से हमारा…

  • मन का आंगन | Man ka Aagan Kavita

    मन का आंगन ( Man ka aagan )   बात  अकेले  पन की हैं । उसमें उलझे पन की है ।। उलझन  में  सीधा रस्ता । खोज रहे जीवन की है ।। कांटे  भरे  चमन  में  एक । तितली के उलझन की है ।। नहीं एक भी फूल खिला । सूने उस मधुबन की है…

  • जय भीम | Jai Bhim

    जय भीम ( Jai Bhim )    जय भीम एक शब्द नही एक वर्ण नही एक जाति या सम्प्रदाय नही और ना ही किसी वर्ग या धर्म विशेष का परिचायक स्लोगन है। जय भीम एक नई क्रांति है सोच है शोध है ताकत है हौसला है चेतना है चिन्तन व प्रेरणा है। जय भीम नये…

  • चाय

    चाय ** अच्छी मीठी फीकी ग्रीन काली लाल कड़क मसालेदार होती है, नींबू वाली, धीमी आंच वाली, दूध वाली, मलाई और बिना मलाई की, लौंग इलायची अदरक वाली भी होती है। मौसम और मूड के अनुसार- लोग फरमाइश करते हैं, तो कुछ डाक्टरों की सलाह पर- मन मारकर फीकी ही पीने को विवश हैं। यह…

  • पूर्ण विराम अंत नहीं | Kavita Purn Viram

    पूर्ण विराम अंत नहीं ( Purn Viram Ant Nahi )   पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है सकारात्मक सोच प्रशस्त, नवल धवल अनुपम पथ । असफलता अधिगम बिंदु, आरूढ़ उत्साह उमंग रथ । आलोचनाएं नित प्रेरणास्पद, श्रम साधना उत्तर धात है । पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है ।।…

  • शिक्षक की अभिलाषा | Shikshak diwas par kavita

    शिक्षक की अभिलाषा ( Shikshak ki abhilasha )   चाह नहीं बी एल ओ बनकर, रोज गांव में टेर लगाऊं। चाह नहीं संकुल बी आर सी, चक्कर कांटू मेल बनाऊं।।   चाह नहीं डाकें भर भर के, बनूं बाबू सा मैं इतराऊं। चाह नहीं मध्यान्ह चखूं और, राशन पानी घर ले जाऊं।।   मुझे छोड़…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *