चुलबुली तेरी एक झलक | Kavita chulbuli teri ek jhalak

चुलबुली तेरी एक झलक

( Chulbuli teri ek jhalak )

 

चुल्बुली  तेरी एक झलक के लिए बेकरार रहता हूं
जिस्म मैं अपने शहर और दिल तेरे पास रखता हूँ

न जाने क्या रिश्ता पनपता जा रहा है हम दोनो में
तू मेरी है चुल्बुली मैं तेरा हूँ ऐसी अब आस रखता हूँ

तेरे शहर से मेरे शहर संगम की दूरी ज्यादा तो नही
दोनो  शहर  के  बीच बस दो चार बाईपास रखता हूँ

ये दिलो का मिलना नजरों का झुकना यूँ नही होता
तू दूर है ये पता नही,मैं तो नजरों के पास रखता हूँ

कभी  चल  के  आऊंगा तेरे दर पर मुलाकात करने
तू भी उसी बेसब्री से मिलेगी ऐसा विश्वास रखता हूँ

ऐसे  हंस  कर  मिलती  हो  दिल मेरा खिलखिला जाता
तुम्हारी मुस्कान और प्यारा से चेहरा अपने पास रखता हूं

चुल्बुली तेरी एक झलक पाने के लिए बेकरार रहता हूँ
जिस्म  मैं  अपने  शहर  और दिल तेरे पास रखता हूँ

यह भी पढ़ें : –

चुलबुली की यादें | Poem Chulbuli

Similar Posts

  • चाहत | Poem chaahat

    चाहत ( Chaahat )   हम हैं तेरे चाहने वाले, मन के भोले भाले। रखते है बस प्रेम हृदय में, प्रेम ही चाहने वाले।   माँगे ना अधिकार कोई,ना माँगे धन और दौलत। प्रेम के संग सम्मान चाहने, वाले हम मतवाले।   हम राधा के विरह गीत है, हम मीरा के भजनों में। हम शबरी…

  • नव वर्ष | Kavita nav varsh

    नव वर्ष ( Nav varsh )     नूतन वर्ष मंगलदायक, अभिनंदन शुभ वंदन है। उमंग उल्लास भाव भरा, नववर्ष स्वागत वंदन है।   मधुर प्रेम रसधार बनो, सद्भावों की बनकर धारा। खुशियों की बरसात करो, उमड़े उर प्रेम प्यारा।   मोहक मुस्कान बन, सबके दिल पर छा जाओ। खुशियों का खजाना, प्यार के मोती…

  • तेरी मोहब्बत में | Pyar par kavita

     तेरी मोहब्बत में  ( Teri mohabbat mein )   मोहब्बत का नशा मुझे , इस कदर छाने लगा है , कि सपनों में चेहरा , उसी का आने लगा है ,, चेहरा जब भी दिखता है उसका, मन में एक लहर सी छा जाती है, उस समय जुबा खामोश होती है, पर आंखें सब कह…

  • दिकु, अब लौट भी आओ

    दिकु, अब लौट भी आओ तू दूर गई तो साँसें भी रूठ गई हैं,आँखों की दुनिया वीरान होकर छूट गई हैं।तेरे बिना ये दिल बेज़ार सा है,हर लम्हा मेरा जैसे अंधकार सा है। हवा से कहूँ या बादलों से बोलूँ,तेरी यादों का किस्सा, मैं किस किस से तोलूँ?राहों में बैठा तेरा इंतज़ार करता हूँ,तू लौट…

  • उम्मीदों की बगिया | Umeedon ki Bagiya

    उम्मीदों की बगिया ( Umeedon ki bagiya )   सजाकर रखे हैं आज भी , उम्मीदों की बगिया हमारी । प्यार होगा उनको फूल से , आएगा तब वो कुटिया हमारी ।। पसंद है जो फूल उनको , है वो बगिया की रौनक हमारी । पसीने से सींचकर बड़ा किया , खिले है सिर्फ अंगना…

  • किसानों की सुन ले सरकार!

    किसानों की सुन ले सरकार! ******* आए हैं चलकर दिल्ली तेरे द्वार, यूं न कर उनका तिरस्कार; उन्हीं की बदौलत पाते हम आहार। सर्द भरी रातों में सड़कों पर पड़े हैं, तेरी अत्याचारी जल तोप से लड़ रहे हैं। सड़कों के अवरोध हटा आगे बढ़ रहे हैं, शायद कोई इतिहास नया गढ़ रहे हैं। आखिर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *