Badi Beti

बड़ी बेटी | Badi Beti

बड़ी बेटी

( Badi beti ) 

 

घर की बड़ी बेटी अक्सर वक्त से पहले ही बड़ी हो जाती है।
पापा के सर का ताज बनने के लिए अपने पैरो पर खड़ी हो जाती है।
मां की सखी, पापा का मान, इन दोनो का ये बनती अभिमान।
मार खाने की बारी भी सबसे पहले इसकी आती है।
मां पापा की प्यारी बिटिया, सबकी उम्मीद बन जाती है।
सबकी उम्मीदे इससे जुड़ती, बड़ी है इसीलिए बड़े सलीके से रहती है।
उसे देखकर चलने के लिए छोटे भाई बहन जो होते है,
इसीलिए ये प्यारी गुड़िया, भूल अपने शौक भी जाती है।
भाई बहन को पढ़ाती भी, कोचिंग टीचर बन जाती है।
गलत करे, तो डांट लगाती, दादागिरी वो दिखलाती है।
ऐसे घर की बड़ी बिटिया, हिटलर दीदी कहलाती है।

 

© प्रीति विश्वकर्मा ‘वर्तिका

प्रतापगढ़, ( उत्तरप्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

हवा का झोंका | Jhonka Hawa ka

Similar Posts

  • ओज भरी ललकार | Poem oj bhari lalkar

    ओज भरी ललकार (Oj bhari lalkar )   ढूंढता रहा हूं सारी दुनिया क्या मेरा वजूद है। आग का दरिया दहकता धधकती बारूद है।   ओज भरी हुंकार कहूं या जलती हुई मशाल। देशभक्त मतवाला कह दो लेखक बेमिसाल।   लेखनी दीपक ले अंधकार मिटाया करता हूं। राष्ट्रधारा में रणवीरों के गीत गाया करता हूं।…

  • हंस लो जरा मुस्कुरा लो | Poem Hans lo Jara

    हंस लो जरा मुस्कुरा लो ( Hans lo jara muskura lo )    हंस लो जरा मुस्कुरा लो जिंदगी है चार दिन की खुशियां तुम मना लो कल किसने देखा है खिली सरसों के जैसे हंसो खिलखिला लो तुम पतझड़ की आंधी में टूट बिखर जाओगे जब यादों के पन्नों मे बस फिर रह जाओगे…

  • दिल के घाव | Dil ke Ghaw

    दिल के घाव ( Dil ke ghaw )    जानता हूं तेरी हर बात मैं जानता हूं तेरे हर जज्बात मैं सुनना चाहता हूं तेरे लबों से मिटा दें दिल के हर घाव को और सुना दें मुझे जी भरकर पढ़ रहा हूं तेरी कश्मकश को पढ़ रहा हूं तेरे मन को छुपी नहीं है…

  • शिक्षक महान | Shikshak Mahaan

    शिक्षक महान ( Shikshak mahaan )    जिसने ज्ञान का अनुपम भंडार दिया गहन अज्ञान से जिसने तार दिया दीपक बन जो जलता रहा और प्रकाश का हमको सदा भान दिया। अनुशासन का कठोर पाठ दिया मर्म गहराई से हृदय में उतार दिया कठिन संघर्षों से खुद तपता रहा और स्वर्ण सा हमको निखार दिया।…

  • देशभक्ति

    देशभक्ति हमारा तन-मन मिट्टी का गुणगान करता हैयही वह भूमि जिस पर अभिमान करता है जहाँ का हर बच्चा देश की सेवा करता हैंमॉ भारती के आँचल की रक्षा करता हैं कभी भी हम भारतीय डरते नहीं मौत सेसिहर जाते दुश्मन सारे हमारे खौफ से तीन रंग रंगीन कपडा नहीं ये हमारी शान हैलहराता हुआ…

  • पायल | Payal kavita

    पायल ( Payal )   कहीं सीमा का बंधन देखो कहीं रात अलबेली है पैरों की पायल है मेरी या जंजीर की बेडी है   रुके रुके कदमों से देखो अठखेली ये करती है रुनझुन रुनझुन करते करते सांझ सलोनी कटती है   छम छम करता बचपन बीता झनक झनक करते यौवन छनक छनक सी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *