Bahar

अजीब रंग में बहार गुजरी | Bahar

अजीब रंग में बहार गुजरी

( Ajeeb rang mein bahar gujri ) 

 

अजीब रंग में अब के बहार गुजरी।
आशाएं ले डूबी साल बेकार गुजरी।

मौसम भी रहा मौन हवाएं थम सी गई।
हमसे पूछे कौन फिजाएं खिल ना रही।
देख कर भी अंजान क्या जमाना हुआ।
टूटे दिलों का आज नया फसाना हुआ।

घटाएं भूल गई अब उमड़ घुमड़ छाना।
प्रीत की फुहार कहां गई सावन आना।
वक्त लोगों को कहां करें बातें सुहानी।
भूल जाएंगे बच्चे क्या होते दादी नानी।

सद्भाव मोती अनमोल लुटाना प्यार से।
बदलेगा जमाना सावन बरसे फुहार से।
रुत भरी मौसमी हवाएं कहां से गुजरी।
महफिले महकी समां में रवानी उतरी।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बदलाव की लहर | Badlav ki Lahar

Similar Posts

  • तस्वीरें | Kavita

    हर पल की यादें होती हैं “तस्बीरें” || १. हर तस्बीर कुछ कहती है ,हर तस्बीर की एक कहानी है | हर पल थमा सा लगता है ,तस्बीर उस वक्त की निसानी है | कुछ धुंधली कुछ नई सी हैं , मानो यादों की जवानी है | हर तस्बीर की अपनी अदा है , हर…

  • उजाला | Kavita Ujala

    उजाला  ( Ujala )   रहती तो है कोशिश यही कि रहूँ मुकम्मल बात पर अपने कर देते हैं लोग हि मजबूर इतना कि फिर ख्याल बदल जाते हैं शिला पर भी यदि गिरती रहे धार तेज जल के प्रवाह की, तो निशान की पड़ हि जाती है छाप संगत बेअसर नही हो पाती होती…

  • मन की बातें | Heart touching kavita

    मन की बातें  ( Man ki baten : Heart touching kavita )   क्या कहूँ कैसे कहूँ तुम्हें मैं मन की बात कही ना जाए ना जाने बार बार मेरे कदम क्यों थम से जाते हैं जब भी गुजरना चाहता हूं तुम्हारे शहर से पल दो पल के लिए ना सही जनम जनम का साथ…

  • स्तवन | Stavan

    स्तवन *सरस्वती शारद ब्रम्हाणी!जय-जय वीणा पाणी!!*अमल-धवल शुचि,विमल सनातन मैया!बुद्धि-ज्ञान-विज्ञानप्रदायिनी छैंया।तिमिरहारिणी,भयनिवारिणी सुखदा,नाद-ताल, गति-यतिखेलें तव कैंया।अनहद सुनवाई दो कल्याणी!जय-जय वीणापाणी!!*स्वर, व्यंजन, गण,शब्द-शक्तियां अनुपम।वार्णिक-मात्रिक छंदअनगिनत उत्तम।अलंकार, रस, भाव,बिंब तव चारण।उक्ति-कहावत, रीति-नीति शुभ परचम।कर्मठ विराजित करते प्राणीजय-जय वीणापाणी!!*कीर्ति-गान कर,कलरव धन्य हुआ है।यश गुंजाता गीत,अनन्य हुआ है।कल-कल नाद प्रार्थना,अगणित रूपा,सनन-सनन-सन वंदनपवन बहा है।हिंदी हो भावी जगवाणीजय-जय वीणापाणी!! संजीव सलिल यह…

  • प्यार के मीठे बोल | Bhaichara kavita

    प्यार के मीठे बोल ( Pyar ke meethe bol )     जो हो अजीज खास उनका स्वागत कीजिए दिल खोल खुशियां बांटो प्यार का तोहफा दीजिए   महक उठे मन का कोना सबको खुशियां दीजिए प्यार की खुशबू महकेगी हर पल महसूस कीजिए   चार दिन की जिंदगी पल पल को जी लीजिए हंसी…

  • टिप-टिप करती बूंदे | Tip-Tip karti Boonde

    टिप-टिप करती बूंदे ( Tip-tip karti boonde )   आसमान‌ से बरस रहा है आज झमाझम पानी, झूमो‌ नाचों ख़ुशी मनाओ मिलकर दिल जानी। टिप टिप करती बूॅंदे लगती है सभी को सुहानी, चलों सोनू मोनू ‌टीना बीना करें सभी मनमानी।। जूता-चप्पल कोई ना पहनो भागो दौड़ो सरपट, उछल कूद का आनन्द लो आओ सब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *