बारह महीनों का संदेश

बारह महीनों का संदेश

बारह महीनों का संदेश

जनवरी
नव वर्ष का संकल्प लो, बदलें अपने हाल,
सर्दी की ठिठुरन में, ढूंढें जीवन का सवाल।
नवजागरण का दीप जलाओ, ज्ञान का करो मान,
मानवता का पाठ पढ़ें, करें सच्चा अभिमान।

फरवरी
प्रेम का संदेश लाए, रिश्तों का आधार,
दुनिया के हर कोने में, बस हो प्यार ही प्यार।
स्वार्थ को हटा कर, दया का दो दान,
दिलों को जोड़ो ऐसे, बने जीवन महान।

मार्च
बसंत की फुहार से, जागे नई उमंग,
प्रकृति का सम्मान कर, करो जीवन संग।
महिलाओं का मान बढ़े, हर मन में हो स्थान,
समता का ये गीत गाओ, यही जीवन की शान।

अप्रैल
गर्मी की आहट से, धरती का हो ध्यान,
पानी बचाओ, पेड़ लगाओ, यही सच्चा ज्ञान।
पर्यावरण का मूल्य समझो, सृष्टि का आधार,
धरती माँ के आंचल में, रखें प्रेम अपार।

मई
गर्मी की तपिश कहे, मेहनत का करो काम,
सूरज से प्रेरणा लो, हर पल रहो थाम।
स्वास्थ्य का ख्याल रखो, संतुलित हो आहार,
स्वास्थ्य से ही बने जीवन, खुशियों का संसार।

जून
पहली बारिश गिरे, मिट्टी की महक लाए,
प्रकृति के इस रूप से, जीवन के रंग आए।
योग दिवस मनाएं, तन-मन को करें शांत,
आध्यात्म के संग जिएं, बनाएं जीवन संत।

जुलाई
हरियाली का पर्व कहे, पेड़-पौधे लगाओ,
जीवनदायिनी धरा के, कर्ज को चुकाओ।
जल संरक्षण सीख लो, जीवन का अमृत जान,
संभालें इस धरा को, यही मानव का मान।

अगस्त
स्वतंत्रता दिवस कहे, वीरों का गान करो,
त्याग और बलिदान की, गाथा में ध्यान करो।
देशप्रेम का दीप जलाएं, हर कोने में प्रकाश,
संविधान का पालन करें, बनें देश का विश्वास।

सितंबर
शिक्षक दिवस याद दिलाए, ज्ञान का महत्व,
गुरुजनों के आशीष से, बने जीवन व्यवस्थित।
शिक्षा की ज्योति जलाएं, अज्ञान मिटाएं हम,
ज्ञान का आदर करें, यही सबसे बड़ा धर्म।

अक्टूबर
गांधी का संदेश कहे, सत्य-अहिंसा का राग,
सबसे बड़ा धर्म वही, जो लाए सद्भाव।
साफ-सफाई का करें प्रण, स्वच्छ भारत बनाए,
हर गली और कोने को, सुंदर स्वप्न सजाए।

नवंबर
गुरुनानक का पावन पर्व, सिखाता हमें सेवा,
त्याग और परोपकार से, जीवन को दे मेवा।
दीप जलाएं ज्ञान का, अंधकार भगाएं,
हर हृदय में प्रेम का दीप, सदा जलाएं।

दिसंबर
सर्दी की चादर ओढ़े, साल का अंत कहे,
जो भी अधूरा सपना था, उसे पूरा करे।
नए साल की तैयारी में, नई सोच जगाएं,
हर दिन को प्रेरणा से भर, जीवन को सजाएं।

संदेश
हर महीने में छिपा है नया संदेश,
जीवन संवारें, जग में भरें आवेश।
प्रकृति, प्रेम और परिश्रम का संग,
हर दिन को बनाएं उत्सव के रंग।

अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’
प्रयागराज

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