बरसात आ गई

बरसात आ गई | Barsaat aa gayi | Kavita

 बरसात आ गई 

( Barsaat aa gayi )

 

बरसात आ गई………||

1.बरसात आ गई, सारे मेढकों की मौज हो गई |
टर्र-टर्र की आवाज, सुन्दर सुर की खोज हो गई |
वहीं एक और सुरीला सुर, पपीहे की पिहुं पिहुं |
मोर का नृत्य देखो, फिल्मी हस्तियां फेल हो गई |

बरसात आ गई………||

2.घने बदलों के बीच, रिम-झिम बारिस की बूंदें |
नन्ही-नन्ही मछलियां मानो, लपक रहीं हो ऊंहें |
ठंडी हवाएं नादियों का जैसे, आँचल बन लाहराएं |
छम-छम करती बूंदों के संग, गलियां मौज मनायें |

बरसात आ गई………||

3.कोयल काली डाली-डाली, सुंदर संगीत सुनाती है |
पानी के संग खेल-खेल के, कलियां भी मुस्काती हैं |
डगर-डगर डाली-डाली, हरियाली बिखर जाती है |
भीगी सोंधी मिट्टी की खुसबू, मदहोशी ले आती है |

बरसात आ गई………||

4.कागज की छोटी नाव बना, मौज मनाते बच्चे |
पानी और कीचड से भीगे, मूरत से लगते अच्छे |
इन्हें देख कर दिल मे मेरे, सवाल उठ रहे पचपन |
काश जवानी के बदले, फिर से मिल जाये बचपन |

बरसात आ गई………||

कवि:  सुदीश भारतवासी

 

यह भी पढ़ें: –

वो-सनम् | Poem O – Sanam

 

 

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