किस पर लिखूँ

किस पर लिखूँ | Poem kis par likhu

किस पर लिखूँ

( Kis par likhu )

 

 1. आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

कलम उठा ली हांथ मे,
कागज कोरा ले लिया |
बैठा गया मै सोच के,
किसी परी पर कविता लिखूँ |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

2.लिखने बैठा तो सोच मे पड गया,
किस-किस की अदाएं लिखूँ |
मगर दिख गई एक तस्बीर,
सोचा वतन के हालात पर लिखूँ |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

3.किसी भूँखे-बिलखते बच्चे पर लिखूँ,
या मरते जवान और किसान पर लिखूँ |
दहेज मे जलती बेटी पे लिखूँ,
या नशे के मारे युवाओं पर लिखूँ |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

4.बेपरवाह औलाद पर लिखूँ,
या लिखूँ बलात्कारी जल्लाद पर |
लिख दूँ किसी रिश्वत-खोर पर,
या अपनी सरकार पर लिखूँ |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

5.कसूर-वार मानू तो किसे मानू,
नेता अभिनेता या अभिमान पर लिखूँ |
लगता है तुम और मैं भी,
गुनेहगार हैं कुछ हद तक |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

6.तो औरों पे क्यों ?खुद को ही,
सुधार-संवार कर लिखूँ |
सोचता हूँ मैं भी हिस्सा इस खेल का,
हुँ तो क्यों न सबसे पहले |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

7.कसूर-बारों में दूसरों से पहले,
अपना खुद का नाम लिखूँ |
तो लो शुरूवात् कर दी मैने,
आपका अपना सुदीश-भारतबासी |

 आखिर,किस पर क्या लिखूँ ||

 

कवि :  सुदीश भारतवासी

 

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