गौरव का क्षण

गौरव का क्षण

हर जागरूक इन्सान
अपने जीवन में सुख चाहता है
वह उसका जीवन हो सुन्दर
और सार्थक इस हेतु प्रयास
भी उसका सदैव होता है कि
बड़े भाग्य से मिलने वाला
यह मानव जीवन न जाए निरर्थक
कुछ लोग सुखी रहने का मंत्र
खोजने में जिंदगी गुजार देते हैं
पर प्रायः निराश ही होते हैं
वह अगर कोई गुणवान और
प्रतिभावान हो तो उसे आगे बढ़
कामयाब होने से कभी भी
कोई नहीं रोक सकता है
क्योंकि जीवन की लंबी दौड़ में
साँझ की तरह ढलते रूप की नहीं
बल्कि सूरज की तरह अँधेरे में
उजालों को रोशन करने
वाले गुणों की कद्र होती है,
ऐसे कई उदाहरण –
“सुनीता विलियम्स “आदि के हैं
जिन्होंने अपनी मेहनत, हुनर आदि
से सभी बाधाओं को पार कर
निष्फ़िक्र हो अपना कार्य के प्रति सर्वस्व
न्यौछावर देकर सभी का दिल जीत
स्वयं का राष्ट्र का नाम
विश्व में रोशन किया है
वह जागरूक मनुष्यों के लिए
सद्गुरुओं आदि द्वारा दी जाती है
छोटी-छोटी कितनी सलाह
उन सलाह के अनुसार चलने पर
वह अपने जीवन में सफलता
को प्राप्त करते है
वह स्वयं का देश का नाम
विश्व पटल पर गौरवान्वित कर
इतिहास में दर्ज कराते है
वह उनको कभी भी नहीं
होता कोई गिला-शिकवा
क्योंकि विजय की पताका
वो फहराते है ।।


प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मेरी माटी मेरा देश | Meri Maati mera Desh

    मेरी माटी मेरा देश ( Meri maati mera desh ) (1) देश हमारा जैसे गंगा सागर अति पावन इसकी माटी है देवों की भी यह मानस माता बंधुत्व भाव ही दिखलाती है गंगा जमुना और सरस्वती की संगम तट पर बहती नित धारा है सांझ सकरे सिंधु चरण पखारे कश्मीर मुकुट सा लगता प्यारा है…

  • Samay par kavita | कैसा यह समय है

    कैसा यह समय है ? ( Kaisa Yah Samay Hai ) शिक्षा को मारा जा रहा है अशिक्षा को बढ़ावा देकर असल को महरूम किया जा रहा चढ़ावा लेकर हिसाब बराबर किया जा रहा कुछ ले दे कर विश्वास पर हावी है अंधविश्वास गरीबों को मयस्सर नहीं अब घास देखता आसमान दिन-रात बरसे तो बने…

  • बातों की समझ | Baaton ki Samajh

    बातों की समझ ( Baaton ki Samajh )   जरूरी नहीं की किसी की कही हर बात को आप समझ ही लें या आपकी बात को कोई दूसरा समझ ले फिर भी, कही जानेवाली बात को यदि समय पर न कहा जाय तो वही बात आनेवाले दिनों मे या तो आपको रुलायेगी या सामनेवालेे को…

  • पिता – एक कल्पवृक्ष | Pita ek kalpavriksha

    पिता – एक कल्पवृक्ष ( Pita ek kalpavriksha )    अपनी कलम से छोटा सा साहस मैंने भी किया है, पिता पर कुछ लिखने का प्रयास मैंने भी किया है। घने वृक्ष के समान पिता होते हैं, जिनके साये में परिवार पलते है , सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश गम के काले बादलों…

  • खिलखिलाया करो | Khilkhilaya Karo

    खिलखिलाया करो ( Khilkhilaya karo )    तलब इतनी न अपनी बढ़ाया करो, दाग-ए-दिल न किसी को दिखाया करो। गर्म आँसू हैं आँखों में देखो बहुत, घुट -घुटके न जीवन बिताया करो। अच्छे लोगों से दुनिया है भरी-पटी, रोज संग में तू भी खिलखिलाया करो। जाँ को बेचो नहीं, दिल को बेचो नहीं, दिल दुखाने…

  • मेघा | Kavita

    मेघा ( Megha )   बरस रे टूट कर मेघा, हृदय की गाद बह जाए। सूक्ष्म से जो दरारे है, गाद बह साफ हो जाए। बरस इतना तपन तन मन का मेरे शान्त हो जाए, नये रंग रुप यौवन सब निखर कर सामने आए।   दिलों पे जम गयी है गर्द जो, उसको बहा देना।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *