वो-सनम्
वो-सनम्

°°° ” वो-सनम् ” °°°

–> क्या ? आज भी तुम “वही”हो ||

1.एक वक्त था ना तुम मुझे जानते थे,ना मै तुम्हें जनता था |
फिर दोनो की उम्र कि जरूरत थी,वक्त का भी फैसला था |
न मैने तुम्हें देखा न तुमने मुझे देखा,सिलसिला शुरू हुआ |
दिली चाहत थी न कोई सवाल,बातों का सिला शुरू हुआ |

–> क्या ? आज भी तुम”वही”हो ||

2.मैने तुम्हें समझा-तुमने मुझे जाना,बेपनाह भरोसा था |
मुझे तुमसे-तुम्हें मुझसे,मिलन की बात का झरोखा था |
न कभी मै मिल सका,न तुम मिले मुझे मगर कभी भी |
तुम्हारी आबरू से खिलबाड करूँ,सोचा नहीं कभी भी |

–> क्या ?आज भी तुम”वही”हो ||

3.तुमसे बातों का सिलसिला कायम,उमंग से चलता रहा |
तुम किसी और के हो गये फिर भी,प्यार गहरा बढता रहा |
कुछ बातें जो अच्छी लगती थीं,सुनना तुमसे तुमने बंद कर दी |
जाने क्या कमी की मैने जो बदले,कहीं और बात शुरू कर दी |

–> क्या ? आज भी तुम”वही”हो ||

4.पता चला जब बात का मुझे, गुस्सा आया मुझे पर प्यार से |
किसी तरह लत् छुडवाई,जो बुरी लत थी बात गैर की यार से
उस तीसरे ने तो बदनाम करने ठानी थी, मैने नाकाम कर दिया |
मेरे यार ने अच्छा शिला दिया, मुझे खुद से अंजान कर दिया |

–> क्या ? आज भी तुम “वही”हो ||

5.आज भी कई बार, याद कर के नींद नहीं आती है मुझे |
वो बातें जो अच्छी लगती थीं, उनसे दूर कर दिया है मुझे |
खुश हो जाऊँ कहाँ गबारा था, अब यादें घेरे रहती हैं मुझे |
मैं तो आज भी वही हूँ तुम, तुम नहीं रहे,ये लगता है मुझे |

–> क्या ? आज भी तुम “वही”हो ||

6.तुमने कहा मेरा साथी जान है मेरी, पर मैने तो ये कहा नहीं |
मेरी भी जान है ऐसा नहीं की, पहले रहा नहीं पर कहा नहीं |
एक ही ख्वाहिस थी मेरी कि, बातों का सिलसिला चलता रहे |
सायद तुम्हारा फैसला ठीक है, रब तुम्हारी झोलियां भरता रहे |

–> क्या ? आज भी तुम “वही”हो ||

7.सारी गलती मेरी थी सायद, मैने तुम्हें परेशान किया होगा |
बड़ी मुश्किल से तुमनेे सायद, मुझसे पीछा छुडाया होगा |
ये कहानी जाने कितने दिलों की, सायद आप-बीती होगी |
वादा है मेरा मेरी ही तरह, सायद गलती उनकी ही होगी |

–> क्या ? आज भी तुम “वही”हो ||

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कवि :  सुदीश भारतवासी

 

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