Basant Ritu

बसंत ऋतु | Basant Ritu

बसंत ऋतु

( Basant Ritu ) 

 

आ गए ऋतुराज बसंत चहुं ओर फैल रही स्वर्णिम आभा,
सुंदर प्राकृतिक छटा में खिली पीले पुष्पों की स्वर्ण प्रभा।

मां शारदे की पूजा का पावन अवसर है इसमें आता,
ज्ञानदायिनी देवी की कृपा से जगत उजियारा पाता।

बसंत ऋतु आते ही सुंदर सुरम्य वातावरण हुआ,
ठंडी पवन की छुअन से मन मस्तिष्क प्रसन्न हुआ।

इस ऋतु की सुंदरता में प्रेमीजन भी हर्षित हो जाते,
मधुर मिलन की आस प्यास में सुमधुर गीत संगीत गाते।

सुंदर सुगंधित फूलों की खुशबू से महक उठा जग सारा,
रंग बिरंगी तितलियों और चिड़ियों से भरा बगीचा प्यारा।

बसंत ऋतु में प्रकृति अपनी अनुपम छटा है दिखलाती,
धरती मां को सुंदर हरियाली और पुष्पों की चादर ओढ़ाती।

बसंत ऋतु की सुरम्यता सबके मन को भाती,
प्रकृति अपनी स्वर्णिम आभा से सबको हर्षाती।

बसंत के आ जाने से जीव जगत सब खिल उठे,
सम्पूर्ण जगत के अंतर्मन में हर्ष उल्लास के गुल फूटे।।

 

रचनाकार –मुकेश कुमार सोनकर “सोनकर जी”
रायपुर, ( छत्तीसगढ़ )

यह भी पढ़ें : –

मै नारी हूँ | Main Nari Hoon Kavita

 

Similar Posts

  • विद्यार्थी | Vidyarthi

    विद्यार्थी ( Vidyarthi )    तैयारियां करते रहो इम्तिहानों की दौड़ भी तो लंबी है जिंदगी की और है वक्त बहुत कम जिम्मेदारियों का साथ ही बोझ भी तो है… बिके हुए हैं पर्यवेक्षक भी तिसपर , चिट भी है और की जेब मे आपके हालात का मोल नही यहां प्रतिस्पर्धा के इस जंग मे…

  • धरा हरसाई | Chhand Dhara Harsai

    धरा हरसाई  ( मनहरण घनाक्षरी )    वसुंधरा मुस्काई है, ऋतु बसंत आई है। खिलने लगे चमन, बहारें महकती। झूम उठी धरा सारी, नाच रहे नर नारी। पुष्प खिले भांति भांति, चिड़िया चहकती। अवनी अंबर सारे, नभ मे दमके तारे। वादियों में गूंज रही, धमाले धधकती। हरी भरी हरियाली, घर घर खुशहाली। रंगों की रंगत…

  • Karuna par Kavita | दया/करुणा

    दया/करुणा ( Daya Karuna )   परमपिता वो परमेश्वर, दयासिंधु  वो  करतार। उसकी करुणा से ही, चलता सारा संसार।   ऐसी  प्रज्ञा  दो  प्रभु  जी, मन न आए कलुष विकार। दया धर्म से भरा हो जीवन, प्रवाहित हो करुण रसधार।   दीन दुखियों के रक्षक तुम हो  जगत्  के  पालन  हार। जल थल गगन में…

  • साहित्यकार | Sahityakar

    साहित्यकार ( Sahityakar )    जीता है जो औरों की खातिर साहित्यकार वही कहलाता है करता नही प्रहार गलत पर खंजर से लेखन से ही वह युगदृष्टा बन जाता है साहित्य नही केवल शब्दों का संचय यह तो विष और अमृत दोनो का समन्वय आवश्यकता होती है जब जैसे साहित्य का होता है सृजन तब…

  • दिल का दर्द | Dil ka Dard

    किसी किसी के लिखा होता दिल का दर्द ( Kisi kisi ke likha hota dil ka dard )    ये दिल की धड़कने है सब पीर पराई क्या जाने। क्या होता है दिल का दर्द वो हरजाई क्या जाने। किसी किसी के लिखा होता दिल का दर्द दीवाना। किसी किसी के जीवन में ही आता…

  • जीवन तरंगिणी : ( दिकु के प्रति प्रेम के भाव )

    जीवन तरंगिणी ( Jeevan tarangini ) जीवन की इस तरंगिणी में, तेरे साथ बहता हूँ,हर लहर में तेरा नाम लेकर मैं खुद को ढूंढता हूँ।तेरे बिना भी दिल की धड़कनों में तू ही बसी रहती है,बस एक तेरे वजूद से ही तो मेरी दुनिया चलती है। हर ख्वाब में तेरे संग होने का एहसास पाता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *