बटवारा

बटवारा

बटवारा

 

बूढ़े बरगद के चबूतरे पर घनेरी छांव में।

देखो फिर एक आज बंटवारा हुआ है गांव में।।

कुछ नये सरपंच तो कुछ पुराने आये,

कुछ बुझाने तो कुछ आग लगाने आये।

बहुत चालाक था बूढ़ा कभी न हाथ लगा,

पुराने दुश्मनों के जैसे आज भाग्य जगा।

पानी कब तक उलचें रिसती नाव में।।

देखो फिर एक०

दो भाई मां बाप बूढ़े और थोड़ी सी जमीन,

हो रही है जेवरातों की अब तो खोजबीन।

भाइयों में प्रेम बहुत था मगर विवाह पूर्व,

जबसे बहुयें आगयी है बैरता सी है अपूर्व।

जिसने बांटे कई घर वो ही रहा प्रस्ताव में।।

देखो फिर एक०

बांट ली सम्पत्ति सारी मोड़ आया किस्से मे,

रो करके मां बाप बोले हम हैं किसके हिस्से में।

छा गया सन्नाटा बज्रपात बेटों पर हुआ,

मां बाप को रखने को तैयार कोई न हुआ।

इन्हीं बेटों के लिए सब कुछ लगाया दांव में।।

देखो फिर एक ०

फैसला सरपंच ने सुना दिया होकर के तंग,

एक के संग मां रहेगी बाप दूसरे के संग।

बड़ी बहन मेरे छोटी छोटे के घर आयेंगी,

पिताजी की खाट भी पशुशाला में लग जायेगी।

इस तरह बंटवारा पूरा हुआ झांव झांव में।।

देखो फिर एक०

?

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-बहेरा वि खं-महोली,
जनपद सीतापुर ( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :

हमसे पूछो न कि हुआ क्या है

 

Similar Posts

  • व्यवहार में सुधार जरूरी बा ! ( भोजपुरी भाषा में)

    व्यवहार में सुधार जरूरी बा ! ( भोजपुरी भाषा में) ***** पहिर के हमरे झमकावेलू, आ# हमरे के आंख देखावेलू। कमरिया लचकावेलू, अंखियां मटकावेलू। रही रही धमकावेलू, जान के महटियावेलू। पुकरलो पर ना आवेलू, सुन के अंठियावेलू। घड़ी घड़ी दु चार बातो सुनावेलू, बड़ा हमके सतावेलू। हो शालू! तू त# बाड़ू बड़का चालू? झट दोसरा…

  • रोज दिखाये वो नखरे है

    रोज दिखाये वो नखरे है     रोज दिखाये  वो नखरे है! बातें मेरी  कब सुनते है   सूखे फूल मुहब्बत के अब ऐसे उल्फ़त में लूटे है   नफ़रत की दीवारे है अब रिश्ते प्यार भरे  टूटे है   पहले प्यार कहा था उसने अब बातें से वो बदले है   भूल गये शायद…

  • एक आह | Kavita Ek Aah

    एक आह ( Ek aah )    एक आह भरी होगी हमने न सुनी होगी। दर्द की दास्तां दिल से वो बयान कर गई। आग कहीं जली होगी हमने न देखी होगी। दिलजलो से बेखबर फिर आंख भर गई। आरजू कहीं पली होगी हमने न कहीं होगी। दिल की धड़कनें दिल तक दस्तक दे गई।…

  • गोंद के लड्डू

    गोंद के लड्डू गोंद के लड्डू, मीठे से स्वाद,सर्दी की सर्द रातों में, गर्मी का फरमाया आबाद।ताजगी से भरी, एक खजाना छुपा,इनमें तो बसी है, सेहत की हर एक ख़ुशबू। गोंद के लड्डू, नारी की सेहत के लिए वरदान,बचपन से बुढ़ापे तक, सबके लिए बनाए गए इनका अनोखा सामान।खुशबू बिखेरे इनसे, स्वाद में कुछ खास…

  • मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda

    मन की पीड़ा ( Man ki Peeda ) मन की पीड़ा मन हि जाने और न कोई समझ सका है भीतर ही भीतर दम घुटता है कहने को तो हर कोई सगा है अपने हि बने हैं विषधारी सारे लहू गरल संग घूम रहा है कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे मतलब की धुन…

  • माँ की ममता | Maa ki mamta poem

    माँ की ममता ( Maa ki mamta ) ( 4 )  माँ की ममता दिव्य है,माँ से है पहचान। माँ की कृपा-कटाक्ष से,बनता पुत्र महान।।1।। ममता के ऑंचल तले, मिलती ठंडी छाँव। जब तक माँ का साथ है, नहीं जलेगा पाँव।।2।। धरती की भगवान है, माँ का रूप अनूप। मातृ-चरण में स्वर्ग है, देवी का…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *