Bhagwan Vaman Avatar par Kavita

भगवान वामन अवतार | Bhagwan Vaman Avatar par Kavita

भगवान वामन अवतार

( Bhagwan Vaman Avatar ) 

 

हर्षोल्लास एवं धूम धाम संग मनाया जाता यह पर्व,
दस-दिनों तक चलता जिस पर हम-सब करतें गर्व।
मलयालम कैलेंडर अनुसार जिसका होता आगाज़,
सितम्बर माह में आता राजा बलि पर करतें है गर्व।।

महाबली असुरों का राजा बलि था जिसका यें नाम,
द्वार से जिसके कोई ख़ाली ना गया ऐसा वो महान।
असुर्राज होनें पर भी भगवान विष्णु का ऐसा भक्त,
वामन रुप धरकर आऐ उसके लिए विष्णु भगवान।।

दैत्य गुरू शुक्राचार्य की राजा बलि ने की ऐसी सेवा,
प्रसन्न होकर गुरुवर ‌ने इनको यज्ञ का सुझाव दिया।
इस महान यज्ञ से प्राप्त हुआ जिनको अभेद्य कवच,
दिव्य रथ अक्षय त्रोण पाकर बलि बलवान हो गया।।

अमरावती पे अधिकार जमाकर इंद्रलोक की सोचा,
आप अश्वमेध यज्ञ करों यह गुरु शुक्राचार्य ने बोला।
तब प्रकट हुएं है धरा पर भगवान विष्णु के अवतार,
मैं सदा ब्रह्मचार्य‌ रहूॅंगा यें भगवान वामन देव बोला।।

पुराणों के अनुसार आप है विष्णु के पांचवें अवतार,
तीन पग भूमि दान में मांगी आपने बलि से करतार।
दो-पग में ही नाप दिया आपनें आकाश एवं पाताल,
तीसरे में बलि धन्य हुआ जिसके लगा पाॅंव करतार।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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