Bhakti Geet

आट्टुकाल माता | Bhakti Geet

आट्टुकाल माता- भक्तिगीत

 

कुछ नहीं जानती आट्टुकाल माते
कुछ नहीं जानती आट्टुकाल माते
अनजानी राहों पर उंगली पकड़ ले जाने से
अविचल चित्त से मैं साथ आयी। (कुछ)

 

आदि मध्यान्त ज्ञान स्वरूपे
आकुलताओं को दूर करने तू आयी।
जानती हूँ मैं तेरी अभौम शक्ति ,
जानती हूँ तुझे आदि पराशक्ति । ( कुछ )

 

अंतर्मन में आनन्द लहरें उपजाती
अति ताकत -स्वरूपिणी आट्टुकाल माते ।
करुणा से संतान पालन करनेवाली,
सतत मैं तेरा नाम जपती रहती । ( कुछ )

 

??

उपरोक्त कविता कवयित्री: डॉ शीला गौरभि जी के स्वर में सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे
?

कवयित्री: डॉ शीला गौरभि

सह आचार्या
हिन्दी विभाग, यूनिवर्सिटी कॉलेज
तिरुवनंतपुरम
( केरल )

यह भी पढ़ें :- 

कृष्ण भक्तिगान | Krishna Bhakti Gaan

Similar Posts

  • हिंदी को अपनाओ | Hindi ko Apnao

    हिंदी को अपनाओ ( Hindi ko Apnao ) बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ,हिंदी हिंदुस्तान की भाषा,हिंदुस्तानी तुम कहलाओ, लिख लो हिंदी, पढ़ लो हिंदी,हिंदी बड़ी अलबेली है,बोलो हिंदी, गा लो हिंदी,हिंदी रंग-रंगीली है,हिंदी को व्यवहार मे लाओ,हिंदी का परचम फहराओ,बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ, खेलो-कूदो हिंदी के संग,हिंदी सखा-सहेली…

  • गांधीजी के जीवन सिद्धांत

    गांधीजी के जीवन सिद्धांत २ अक्टूबर १८६९ को पोरबंदर में जिसने जन्म लिया,पुतली बाई मां पिता करमचंद ने मोहनदास नामकरण किया,पीर पराई देख जिसकी आंखें और हृदय भर आता था,करूणा दया देख टैगोर ने जिन्हें महात्मा नाम दिया। माता के गुरु श्रीमद राजचंद्र जैन धर्म के अनुयायी थे,गांधीजी के विदेश जाने पर मां के मन…

  • नयकी सरकार कुछ ना कुछ करी!

    नयकी सरकार कुछ ना कुछ करी! ******** खांटी बा बिहारी जल्दी हार न मानी कइले बा पूरी तैयारी विपक्ष में बैठी लेकिन सांस चैन के ना लीही सरकार के नाक में दम क# दीही विपक्ष बा मजबूत! एने ओने करे के# ना दीही छूट ना होखे दीही जनता के कमाई के लूट! मजबूरी हो जाई…

  • पुनर्जन्म | Kavita Punarjanm

    पुनर्जन्म ( Punarjanm ) मैंने सबसे कीमती वस्तु को, तलाशना चाहा,  हीरे-जवाहरात , मणि माणिक , सभी लगे मिट्टी के धूल समान,  मैं अपनी धुन में,  खोजता चला जा रहा था , दिन, महीने में बदलने लगे , महीने वर्ष में , लेकिन नहीं मिल सकी, वह कीमती तोहफा, जो संसार में सबसे कीमती हो।…

  • kia ho gai halat -क्या हो गई हालात

    क्या हो गई हालात   देख ले मालिक अन्नदाता की क्या हो गई हालात कितना तड़प रहा है किसान पी एम बदला सी एम बदला फिर भी ना बदले किसान के हालात कितना तड़प रहा है किसान आया पी एम बड़ा ही अंधा नहीं दिख रहा है सड़कों पर पड़ा अन्नदाता कहीं पे भूखा कहीं…

  • तभी बचेगा लोकतंत्र

    तभी बचेगा लोकतंत्र   आओ हम संकल्प सभी लें , जन गण मन को जगानेका ! भारत मांता की गरिमा संग , लोकतंत्र बचाने का !! रावण ने की थी जो गल्ती , उसका क्या परिणाम हुआ ! धृतराष्ट्र में मोह के कारण , उसके कुल का नाश हुआ !! जयचंद की ईर्ष्या द्वेष के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *