Bhay

भय | Bhay

भय

( Bhay )

 

उथले पानी में तैरे
तैरे फिर भी डर कर तैरे
पास पड़ी रेत मिली
पैरों के धूमिल चिन्ह मिले
लहर पानी की जो आई
उन चिन्हों को मिटा गई
भय के मोहपास के कारण
मोती की आशा मिलने की
खाली मेरे हाथ रहे
कुएं में रहने वाला मेंढक
खुद को ज्ञानी समझे है
पाला पड़ा समंदर से
चक्षु ज्ञान के हैं खुले
आत्मग्लानि को त्याग वही
अंतर्मन की पीड़ा हरने
उत्साह उमंग भरा होता
कूदी होती गर गहरे में
मोती में चुन पाती खुद से
जीवन सार्थक किया होता

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

कविता शादी | Shaadi par Kavita

Similar Posts

  • नैया ला मोर तार देना

    नैया ला मोर तार देना मेहा आएवं गणेश तोर दुवारी।करइया तैं हावस मुसवा के सवारी।।विपदा ला मोर गणपति जी टार देना।नैया ला मोर गणपति जी तार देना।। अरजी करथवं मेहा महाराज तोर।छाए हावय अंधियारा सब्बो ओर।।मोला तेहा गणपति जी उबार देना।नैया ला मोर गणपति जी तार देना।। पूजथे तोला गजानन सरी संसार।हावस विघ्नहर्ता दया सागर…

  • देखते है | Dekhte Hain

    ( ऐसे तो कितने ही सारे अतुल सुभाष है जिन्हें कोई जानते नहीं है, उनमें से कुछ दुनिया में आज भी मौजूद है कुछ इस दुनिया से जा चुके हैं!! ) देखते है देखते है अब कौन हो हल्ला करेगा।देखते है अब कौन कैंडल जलाएगा। निर्दोष पुरुष बेमौत मरा है यह देखो,कौन जो खिलाफ आवाज़…

  • मैं हूं प्रयागराज | Prayagraj

    मैं हूं प्रयागराज ( Main Hoon Prayagraj )    इतिहास के पृष्ठों पर स्तंभ-अभिलेखों पर पथराई नजरों से ठंडे हाथों से नदी-नालों का खेत-खलिहानों का शहर-नगरी में तपती दुपहरी में संगम के तट पर कण-कण छानते हुए देख अतीत के अपने रूप-नक्शे दिखा इलाहाबाद उदास! उदास! उदास बोला उदास मन से रखना मेरे अतीत को…

  • Hindi Kavita | Hindi Poem| Hindi Poetry -मैं और मेरे श्रोता

    मैं और मेरे श्रोता ( Main Aur Mere Shrota ) ** जी भर के मुझ को देखो थोड़ा सा मुस्कुराओ हम सामने तुम्हारे पलके झुका रहे है ** दिल में उतरने का  वादा जो कर रही हूँ तुमसे भी लूंगी वादा दिल में बसाये रखना ** एसी बातो से ना हमको निराश करना हम गीत…

  • प्रकृति हूं मैं कदर करो

    प्रकृति हूं मैं कदर करो जल मैं, अग्नि मैं, वायु मैं ।वृक्ष,जीव,प्राणी, अचल हूं मैं ।। स्वर्ग का द्वितीय रूप मैं ।ईश्वर का महा चमत्कार मैं।। मनमोहक सा दिखता हूं ।मनमोहित मैं करता हूं ।। जिधर देखो , उधर हूं मैं ।हर तरफ हर जगह हूं मैं ।। चंद्र मैं , सूर्य मैं , भू…

  • मिलाते तो सही | Milate to sahi poem

    मिलाते तो सही ( Milate to sahi poem )   आवाज़ से आवाज़ मिलाते तो सही….! दिल से दिल मिलाते तो सही…..! मन से मन मिलाते तो सही…..! हाँ में हाँ मिलाते तो सही…….! सुर से सुर मिलाते तो सही…..! हाथ से हाथ मिलाते तो सही…..! नज़र से नज़र मिलाते तो सही……! क़दम से कदम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *