बिटिया मांगे अपना हक | Bitiya Mange Apna Hak

बिटिया मांगे अपना हक

( Bitiya mange apna hak )

 

अब अब्बू मुझको भी पढ़ने दो,
हमें क्यो कहते हो आप नो नो नो।
दिलादो पाटी बरता और पेंसिल दो
फिर हमको कहो विद्यालय गो गो गो।

दिलादो प्यारी सी यूनिफॉर्म दो,
सुहानी जुराबे और जूता जोड़ी वो‌।
पहनकर जाऊॅं साथ खाना ले जाऊॅं,
अज्ञानी रहना यह शर्म की बात है वो।।

जा रही चिंकी-पिंकी व मिंकी,
खोई खोई सी है तुम्हारी ये बच्ची।
करनी होगी कठोर तुमको ये छाती,
नाम करुॅंगी आपका कहती हूॅं सच्ची।।

समय आज का है ये अनमोल,
बिटिया मांगे अपना हक ये बोल।
न रखो भेद अब हम भाई-बहन में,
समान हमको रखकर निभाओ रोल।।

उम्मीद ये मेरी अब टूटने न दो,
आत्मविश्वास मेरा बना रहने दो।
पढ़-लिखकर आसमान ये छूने दो,
क़लम उठाकर मुझे अब हाथ में दो।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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