चक्रधारी यशोदा का लाल | Yashoda ka Laal

चक्रधारी यशोदा का लाल

( Chakradhari yashoda ka laal ) 

 

एक वो ही है सबका पालनहार,
प्रभु ,परमपिता और तारणहार।
हर कण-कण में आप विद्यमान,
दुष्टों का करते हो पल में संहार।।

श्री राम बनकर रावण को मारा,
और कृष्ण बनकर कंस पछाड़ा।
तुम्हारी माया का पाया नही पार,
लिया तुमने ही नरसिंह अवतार।।

तू गिरधर व गोपियों का गोपाल,
तू ही मुरलीधर और है नंदलाल।
तुमे शत-शत नमन मेरे भगवान,
चक्रधारी तू ही यशोदा का लाल।।

जन्म- मरण के सारे खेल रचाएं,
धरती पर आकर प्रत्यक्ष दिखाएं।
जैसा कर्म करें वो वैसे फल पाएं,
नारायण स्वयं नर रूप धर आएं।।

जिसने मन से लिया कृष्णा नाम,
उसका बना है सब बिगड़ा काम।
तुम्हारे नाम अनेंक पर रूप एक,
तू ही ब्रह्मा विष्णु और यह महेश।।

एक तू ही है सभी का पालनहार,
जो देख रहा सब का ये व्यवहार।
मालिक किसको निर्धन है बनाना,
कौन कैसा चला रहा है कारोबार।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • आइसक्रीम | Kavita Ice Cream

    आइसक्रीम ( Icecream ) आइसक्रीम तो सभी की पसंदीदा कहलाती है, सर्दी गर्मी बारिश हर मौसम में खायी जाती हैं। बचपन में मटका कुल्फी की टन टन हमें बुलाती थी, उसके पास पहले पहुँचने की होड़ हम में लग जाती थी। ऑरेंज, वनीला, रास्पबेरी मैंगो कितनी प्यारी लगती थी, सॉफ्टी कोन की तो फिर भी…

  • चक्र सुदर्शन धारी | Poem chakra sudarshan dhari

    चक्र सुदर्शन धारी ( Chakra sudarshan dhari )   चक्र सुदर्शन धारी केशव लीला अपरंपार तेरी मंझधार में डूबी नैया आकर करना पार मेरी   मुरली मोहन माधव तेरी मधुर मनोहर शान है सकल चराचर के रखवाले जन करे गुणगान है   संकट मोचन मोहिनी मूरत मुरली अधर सुहानी कृष्ण कन्हैया दीनदयाला भजन करते सुरज्ञानी…

  • पुनीत पर्व शरद पूर्णिमा | Poem in Hindi on Sharad Purnima

    पुनीत पर्व शरद पूर्णिमा ( Puneet parva sharad purnima )    ज्योत्स्ना मचल रही,अमिय वृष्टि करने को षोडश कला सोम छवि, अनूप कांतिमय श्रृंगार । स्नेहिल मोहक सौंदर्य, अंतर सुरभिमय आगार । धरा रज रज भावविभोर, तृषा तृप्ति कलश भरने को । ज्योत्स्ना मचल रही, अमिय वृष्टि करने को ।। पटाक्षेप काम क्रोध द्वेष, शीतलता…

  • मौसम-ए-गुल | Poem mausam-e-gul

    मौसम-ए-गुल! ( Mausam-e-gul )   ख्ब्वाब अपना पांव पसारने लगे हैं, परिन्दे घोंसले को लौटने लगे हैं। दिल के दस्तावेज पे लिखा उसने नाम, आजकल दिन उसके इतराने लगे हैं। बुलबुल भी खुश है और चमन भी खुश, मौसम-ए-गुल देखो बिहसने लगे हैं। खिजाँ के दिन कब टिके हैं जहां में, मेंहदी वाले हाथ महकने…

  • गांव की रौनक पंगत | Gaon ki Ronak Pangat

    गांव की रौनक पंगत ( Gaon ki ronak pangat )   गाँव रौशन हैं ऐसे आयोजनों से! शहरों ने ली करवट बने बाबू शहरी बुरबक! ठगे/लूटे जा रहे शरेआम मैरैज हाल में केवल तामझाम बद इंतजाम! पकड़े प्लेट रहिए खड़े कतार में रहिए बारी के अपने इंतजार में! मिल जाए तो भकोसिए खड़े खड़े कुछ…

  • बीवी और मच्छर | Biwi aur Machar

    बीवी और मच्छर ( Biwi aur machar )    बीवी के गाल पर मच्छर बैठा था, मैं बड़ी ही उधेड़बुन में पड़ा था। समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ, मच्छर को जाने दूं या उसे मारूं। तभी बीवी ने मुझे इशारे से बुलाया, मच्छर मारने का फरमान सुनाया। ऐसा सुनहरा मौका कैसे छोड़ सकता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *