कहानियां

  • एक आस अब भी | Kahani Ek Aas Ab Bhi

    सुदेश जी का अपना बसा बसाया कारोबार हो चुका है जिंदगी एक प्रकार से सेटल हो गई इसके लिए उन्होंने बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जिंदगी के चार दशक कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। अपने व्यवसाय को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उन्होंने दिन को दिन नहीं समझा और रात को रात।…

  • नालायक | Laghu Katha Nalayak

    “अंकल, हम आपकी बेटी जैसी नहीं लगती जो आप इस घर में इतना तनाव बनाए हुए हैं? पापा मेरे, आपकी बेटी की शादी के लिए प्रतिबद्ध थे कि भाई की बेटी हमारी बेटी होती है। हम किसी भी हाल में अलग नही होंगे। जब आपकी बेटी की शादी हो गई तो आप अलग होने के…

  • कब आएगी माई | Kahani Kab Ayegi Mai

    दिव्यांश अभी 2 वर्ष का भी नहीं हुआ था कि उसकी दादी नहीं रही। वह दादी को माई ही कहकर बुलाया करता था। दादी को न देखकर पूछता कि पापा दादी कब आएंगी। उस अबोध बालक को उसके पिता कैसे समझाते कि उसकी दादी अब इस दुनिया में नहीं रही। अक्सर वह झूठ बोल दिया…

  • परहित का फल | Kahani Parahit ka Phal

    एक आदमी बहुत गरीब था। बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। एक बार उस लड़के की मां ने कहा — “जाओ बेटा!जंगल में एक बाबा जी आए हुए हैं। वह जो भी आशीर्वाद देते हैं फलित होता है।” लड़का मां का आशीर्वाद लेकर चल दिया । रास्ते में एक सेठ का…

  • आंखों की चमक | Kahani Aankhon ki Chamak

    राधिका शादी होने के बाद अपने ससुराल में आई थी भरा पूरा परिवार था। ससुर भी पढ़े लिखे थे। दकियानूसी विचारधारा को नहीं मानते थे। राधिका को याद है एक बार मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला का देहांत हो गया था। राधिका उनके यहां बैठने गई। लौट कर आने पर दरवाजे पर ही नहाना पड़ता…

  • टूटता आशियाना | Kahani Tootata Aashiyaana

    चारों तरफ अफरातफरी मची हुई है। पूरे मार्केट में सन्नाटा छाया हुआ है। सभी सर पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। सरकारी फरमान जारी हो चुका है। सभी के मकान दमीजोख होंगे। रामू ने अभी किसी प्रकार से नया घर बनाया था। उसकी बहुत चाहत थी कि रोड पर एक कुटिया बनाकर दाल रोटी का…

  • एक हंसती हुई लड़की | Kahani Ek Hansti Hui Ladki

    लोग उसे बातूनी कहते हैं। कभी-कभी तो उसकी सहेलियां उसे निरी पागल तक कह कर चिढ़ाती हैं। ऐसा कहने पर भी चिढ़ने की जगह वह ठठा मार कर हंसती रहती हैं। खुश वह इतनी रहती की पूरी क्लास में उसके हंसी ठहाके गूंजता। वह क्लास में हो और ठहाके ना हो ऐसा कभी हुआ नहीं…

  • मुट्ठी भर गुलाल | Laghu Katha Mutthi Bhar Gulal

    “आओ सोमेश्वर आओ, आज होली का दिन है। जब तक जिंदगी है तब तक तो मालिक और मजदूर चलता ही रहेगा। लेकिन बैठो, मालपुए और दहीबड़े खाकर अपने घर जाना।” परमेश्वर ठाकुर ने सोमेश्वर को प्यार से बुलाते हुए कहा। “हांँ मालिक, क्यों नहीं,जरूर खाकर ही जाएंगे।” वह कुछ दूर बैठते हुए कहा। “दूर बैठने…

  • लवली | Kahani Lovely

    लवली कुछ गुमसुम सी बैठी है। उसे न जाने क्या हो गया है कि सारे घर में धमाल मचाने वाली किस सोच में डूबी है । मां को देखते ही प्रश्नों की झड़ी लगा देती है – अम्मा अम्मा आप क्यों मांग में सिंदूर लगाती हो ? मुझे क्यों नहीं लगाती ? हम कान क्यों…

  • माई का आशियाना | Mai ka Ashiyana

    एक माई थी। जिसका अपना कच्चा मकान टूट कर गिर गया था। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि घर को बना सके। जिसके कारण वह मड़ैया बनाकर किसी प्रकार गुजर बसर कर रही थी। पति को गुजरे धीरे-धीरे दशकों हो गए थे। जो भी कमाई हो रही थी। किसी प्रकार से घर में नून…