कहानियां

  • मज़हब की दीवारें | Mazhab ki Deewaren

    आज दीपावली का त्यौहार है। प्रकृति में हर तरफ़ नव उत्साह एवं दिवाली का परमानंदित प्रकाश फैला हुआ है। यह दिव्य प्रकाश बिजली से जलने वाली लड़ियों एवं दीपों से आ रहा है अथवा लोगों के अंतर से-कह पाना बड़ा कठिन है, क्योंकि दोनों ने अपने-अपने स्वरूप को बिना किसी व्यवधान के एक-दूसरे में बड़ी…

  • डिजिटल मनी ऑर्डर | Laghu Katha Digital Money Order

    लघु कथा: “डिजिटल मनी ऑर्डर” प्यारे मुन्ना,खुश रहो। आज पेटीएम से तुम्हारे दिए हुए पैसे प्राप्त हुए, बहुत खुशी मिली। लेकिन उससे ज़्यादा खुशी तब मिलती जब तुम फोन पर मुझसे बात कर लेते। 5 दिन से तुम्हें फोन कर रही हूँ। लेकिन तुम मेरा कॉल नहीं उठा रहे हो। मैसेज का भी रिप्लाई नहीं…

  • दीवाली | Diwali Katha

    कोमल के पिता आज बहुत परेशान थे क्योंकि आज ही उन्हें पता चला था कि कुछ ही दिनों बाद दीवाली का त्यौहार आने वाला है और अब उन्हें भी ये चिंता सताने लगी थी कि हाथ में पैसे तो हैं नहीं दीवाली मनाने के लिए खर्चों का इंतजाम कैसे करेंगे। जब उनकी लाडली बच्ची दूसरे…

  • नसीहत | Laghu Katha Naseehat

    “बड़े बुजुर्गों ने कहा है कि अपने सगे भाई का भी आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए। उसके दिल में आपके प्रति घृणा भी हो सकती है जब उसका स्वार्थ टकरा जायेगा। यदि उसके बेरोजगार रहते उसका नाम किसी भी प्रॉपर्टी में खरीदते समय लिखवा लिया जब आप नौकरी में हो। आपका छोटा भाई शादी…

  • सच्चा प्यार – अ ट्रू लव स्टोरी

    प्रभात और संध्या दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे। नाम तो उनके विपरीत थे। पर दोनों को देखकर यूं लगता था मानो “मेड फॉर ईच अदर” है। कहने को तो उनकी अरेंज मैरिज थी, लेकिन उनके बीच में लव मैरिज से ज्यादा प्रेम था। प्रभात एक छोटा-सा व्यापारी था और संध्या स्कूल में…

  • “Kidnap”- एक क्राइम कथा

    मेरे तैयार होते ही एक कॉल आया और सामने से आवाज आई! प्लीज मुझे बचा लो यह लोग मुझे मार डालेंगे! मैं आवाज पहचान नहीं पा रहा था। तभी किसी ने रिसीवर उसके हाथ से छीन लिया और नीचे पटक दिया। मैं बुरी तरह से चौंक गया। मैं समझ गया था किसी लड़की की जान…

  • ख़ुशी | Laghu Katha Khushi

    एक गाँव में एक फ़ैक्टरी होती है,जिसमें 100 कर्मचारी काम करते हैं। सब खुश थें,पैसे सभी को थोड़े कम मिलते थे‌। फ़ैक्टरी दूर भी थी तब भी वो खुश थे। घर के पास भी फ़ैक्टरी थी वहाँ के मैनेजर बुलाते भी थे कि आपको ज्यादा सैलरी मिलेंगी यहाँ लेकिन वहाँ जाकर काम करने को कोई…

  • शक | Shak

    और दिनों से थोड़ा अलग आज कृति काॅलेज से आती हुई थोड़ा ज़्यादा की ख़ुश नज़र आ रही थी । घर आकर उसने अपना बैग रखा ही था कि तभी उसकी माँ अमिता की नज़र उसके मुस्कुराते हुए चेहरे और कलाई पर बंधी घड़ी पर पड़ी । अमिता ने अचानक से उसका हाथ पकड़ लिया…

  • लघुकथा “गेटआऊट ” | Get Out

    उसकी कॉलबेल बजी। एक नहीं , कई बार। बदन पर एक शॉल डाली और वह सशंकित मन गेट की ओर बढ़ी। आख़िर कौन हो सकता है इस ठिठुरते हुए ओले से बूंदा -बांदी के बीच। युवा अनछुए बदन में सिहरन -सी हुई। दरवाजा खुलते ही वह अन्दर सेहन में आ खड़ा हुआ। खूबसूरत, शालीन मगर…

  • श्राद्ध | Shraddh

    “हेलो पण्डित जी प्रणाम!…… मैं श्यामलाल जी का बेटा प्रकाश बोल रहा हूं, आयुष्मान भव बेटा!….. कहो कैसे याद किया आज सुबह सुबह। जी पण्डित दरअसल बात ये है कि हमारे पिताजी का स्वर्गवास हुए एक साल हो गए हैं और उनका श्राद्ध का कार्यक्रम हम धूमधाम से मना रहे हैं जिसमें मैंने नाते रिश्तेदारों…