कहानियां

  • पुनर्जन्म | Kahani Punarjanm

    ( 2 )  धीरे-धीरे महीने हो गए थे ।अभी बच्चे की आंख नहीं खुली ।उसके माता-पिता अपलक निहार रहें थे। उन्हें कुछ नहीं समझ में आ रहा था कि क्या किया जाए। बच्चे का शरीर सूख कर काटा हो चुका था। फिर भी माता-पिता की आशा थी कि मेरे लाल को कुछ नहीं होगा। मनुष्य…

  • द्वंद | Dvand

    वैसे वह एक हट्टा कट्टा नौजवान है । उसे जिम जाने का शौक बचपन से है । क्या मजाल किसी को की उसको कोई नीचा दिखा कर चला जाए? मोहल्ले में ऐसी धाक जमाया है पट्ठा कि पूछो मत। सब उसे देवता समझते हैं देवता। परंतु इस देवता के हृदय में जलने वाली अग्नि को…

  • नमो नारायण – गुरु जी | Namo Narayan

    सौम्य से दिखते चेहरों के बीच एक अनकहा दर्द हृदय में छुपाए रिसेप्शन पर आने जाने वालों को मधुर मुस्कानों से सबका स्वागत करती है । पहली बार जब उन्होंने मुझे देखा तो पहचान नहीं होने के कारण अपनी उसी स्टाइल में पूछा – ” आपको किसी से मिलना है क्या? इंक्वारी के लिए आए…

  • लघु कथा सुकून | Laghu Katha Sukoon

    सीता पेपर देने अपने पति के साथ भोपाल आई थी। पेपर अच्छा रहा लौटते समय एक सुलभ कांप्लेक्स के सामने गाड़ी रोक कर सीता के पति कहने लगे । बड़ा साफ सुथरा है, सुलभ कांप्लेक्स। जब तुम पेपर देने गई थी। तब हम लोग यहां आए थे। तुम भी फ्रेश हो जाओ फिर रास्ते में…

  • आजादी | Poem on Azadi in Hindi

    आजादी ( Azadi )   हमको प्यारी है हमारी आजादी, बड़ी मुश्किल से पाई हमने आजादी कई वीर शहीद हुए हैं हमारे देश के , कई घर ऊजड़ गए तब पाई ये आजादी ।। जब जब मातृभूमि पर संकट आया तब हर घर ने राष्ट्रध्वज फहराया, अपने मनोबल और राजधर्म से हमारे वीरों ने सदैव…

  • अवध में श्रीराम | Avadh me Shri Ram

    अवध में श्रीराम ( Avadh me Shri Ram )   धन्य धन्य हुई अवधपुरी है स्वर्णिम से ये नज़ारे हैं, जग के पालनहारे रघुवर भव्य मंदीर में पधारे हैं!! जय हो प्रभुवरम्, स्वागतम् जिनवरम् ! जय जय प्रभुवरम् , सुस्वागतम जिनवरम् !! आपके स्वागत में स्वर्गों से उतरे देव भी सारे हैं, जग के पालनहारे…

  • श्री राम | Shri Ram

    श्री राम ( Shri Ram )   कौशल्या के सुत,दशरथ नंदन आए अवध की नगरी श्री राम बोलो श्री राम राम राम, श्री राम राम राम श्री राम राम राम श्री राम राम राम चरण पखारो,तिलक लगाओ, गाओ मंगल गीत होगा फिर से राम राज्य, प्रभु आए हैं निज धाम बोलो श्री राम राम राम…

  • दो और दो पांच | लघुकथा सह आत्मकथा

    कहते है कि मजाक में भी कहावते सच हो जाती है। सोचो कैसे चलो चलते है लगभग 5 वर्ष पहले जब मेरे ससुराल में मेरी पत्नी के बड़े पापा के यहां बड़े लड़के की शादी थी। हमारे यहां शादी के रीति रिवाजों में मंडप को कच्चे धागे से सुतना या कहो तो कच्चे धागे से…

  • राशनकार्ड ( लघुकथा ) | Ration Card

    एक दिन ईशा रसोई के सारे डिब्बे साफ करके बड़े खुश थी सोच रही थी के पहिले के जमाने में कितने बड़े कंटेनर होते थे परंतु आजकल आधुनिकता के चलते सुपरमार्केट या मॉल में से सिर्फ पैकेट ही प्राप्त किए जाते हैं । वजन ढोने के चलते लोग उतना ही पैकेट या समान ले लेते…

  • सासू मां का बहु के लिए अनमोल तोहफा

    राधा की शादी एक अच्छे परिवार में हुई थी वह अपनी ससुराल में इकलौती बहू थी। बस एक छोटी नंद थी और सास ससुर। ससुराल में सभी बहुत अच्छे थे। राधा को अपनी बेटी की तरह ही मानते थे। पति भी उसको बहुत प्यार करता था उसकी सभी जरूरतों का ध्यान रखता था। नंद तो…