आज़ाद है
आज़ाद है कहने अपनी बात को अब हर सुख़न आज़ाद हैबंदिशें कोई नहीं अब हर कहन आज़ाद है हर गली हर शह्र और आज़ाद है ये हर पहरसाँस लेते चैन से हम ये पवन आज़ाद है नफ़रतों के दायरों को तोड़ डालो मिल के सबइल्तिजा बस अम्न की है, अब वतन आज़ाद है टूटी ज़जीरें…
रहे दिलों में मुहब्बत वतन की दुआ मांगता हूँ हमेशा अमन की ?रहे दिलों में मुहब्बत वतन की न बरसात हो नफ़रतों की कभी भीसलामत रहे बस बहारें वतन की मेरी जान कुर्बान है इस वतन परयहीं आरज़ू है मेरे यार मन की वतन से करो प्यार इतना दिलों सेहमेशा महके हर कली ही चमन…
दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना।आपकी दिलकशी का क्या कहना। आपके मरमरी से क़ालिब पर।चांद की चांदनी का क्या कहना। दिल परेशान हैं गुलाबों के।आपकी नाज़ुकी का क्या कहना। लूट लेती है आन में दिल को।ह़ुस्न की कजरवी का क्या कहना। इस पे क़ुर्बान सीमो-ज़र सारे।प्यार की…
कर रहा मनुहार है क्यों अकारण कर रहा मनुहार हैबात तेरी हर मुझे स्वीकार है मेरे होंठो पर तुम्हारी उंगलियाँमैं समझता हूँ यही तो प्यार है तेरा यह कहना तुम्हें मेरी क़सममुझ अकिंचन को यही उपहार है बात तेरी मान तो लूँ मैं मगरसामने मेरे अभी संसार है दे दिया जीने का मुझको रास्तातेरा यह…
क्या हुआ कैसे हुआ क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआजो हुआ वो था नहीं सोचा हुआ फिर से रस्ते पर निकल आए हैं लोगफिर से देखा वो ही सब देखा हूआ दर्द तन्हाई अंधेरा सब तो हैंमैं अकेला तो नहीं बैठा हुआ उड़ गयी उल्फ़त किसी दीवार सेधूप में धुंधला गया लिख्खा हुआ इक रियासत…
किधर जाता है राह-ए-उल्फ़त से परेशान, किधर जाता हैअपनी मंज़िल से भी अनजान किधर जाता है झूठ से हार के नादान किधर जाता हैमार के अपना तू ईमान किधर जाता है बिक रहा हूँ सरे बाज़ार तेरी शर्तो परदे के मुझको तू ये नुक़सान किधर जाता है तेरी यादों का उठा था जो मेरे सीने…
ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ।आपका बस हमें आसरा चाहिए ।। हार कर भी हमें सोचना चाहिए ।उसकी वाजिब सबब ढूँढ़ना चाहिए ।। जाँ रहा हूँ मिलूँगा तुझे भी सनम ।देखना पर तुम्हें रास्ता चाहिए ।। दो विदाई मुझे आज मुस्कान से ।फिर मिलूँ मैं तुम्हें तो दुआ…
अपने सजन पर रहे बोझ बाक़ी न इतना भी मन पर रहेकुछ भरोसा तो अपने सजन पर रहे राहे- मंज़िल थी काँटो भरी इस कदरदाग़ कितने दिनों तक बदन पर रहे आज जी भर के साक़ी पिला दे हमेंमुद्दतों से ही हम आचमन पर रहे कह रहे हैं ग़ज़ल हम तो अपनी मगरवोही छाये हमारी…
कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…