कविताएँ

  • सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में

    सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में जब दिल पत्थर हो जाएहंसते खेलते रोना आ जाएमानवीय भावनाएहमें जीवित रखने के लिएकभी डिफ़ाल्ट होना पड़ जाएहंसते खेलते रोना आ जाएजब दिल पत्थर हो जाए। पाल सर कभी खुशीयों की ताली बजवाते थेमानवता और प्रेम का हमेशा पाठ पढ़ाते थेहार को जीवित रखो विजय पथ पर बढ़ाते थेकितनों…

  • उम्मीद एक परिंदा है | एमिली डिकिन्सन

    उम्मीद एक परिंदा है उम्मीद एक परिंदा हैजिसका रूह में बसेरा हैबिन शब्दों के एक धुन गाता हैऔर जो कभी थमता नहीं, बिल्कुल भी और तूफ़ानों में भी सबसे मधुर सुनाई देती हैऔर भयंकर होना चाहिए तूफ़ानजो इस नन्हे परिंदे को हतोत्साहित कर सकेजिसने बहुतों को रखा ऊर्जावान मैंने इसे सुना सर्द जमीं परऔर अजनबी…

  • चरित्रहीन | Charitraheen

    चरित्रहीन ( Charitraheen ) “घर आकर बताता हूँ”जब जब उसने कुछ पूछना चाहाहमेशा यही उत्तर मिलाऔर फिर कभी ना वो समय आयाना ही उसे कुछ बताया गया।उसे कभी नहीं लगा किवह भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है।दोनों कभी नहीं बन पायेएक दूसरे के सहभागी,बस एक दूसरे को ज़िम्मेदारी बनढोते रहे।बिना ये सोचे किएक समय…

  • श्रृंगार | Shringaar

    श्रृंगार ( Shringaar ) बड़े गर्व से शीश झुका कर कहता निश्चल निर्जल मन, भारत मां को आज सजाए भाषाओं के आभूषण। बाजूबंद उर्दू के बांधे , हाथों में गुजराती कंगन, उड़िया के कुंडल कानों में , बलिया में  पायल की झनझन, तमिल मुद्रिका, नथ पंजाबी, आसमी बड़ी सयानी है,  पैरों में है कन्नड़ बिछुए,…

  • कोई कुछ भी करले

    कोई कुछ भी करले कोई कुछ भी करले ऊ बाप ना होईहर मोड़ पर जो खड़ा रहे अइसन साथ ना होई । बिना सोचे समझे जो सर्वस्व करे निछावरअइसन केहू में जज्बात ना होई। कोई कुछ भी करले ऊ बाप ना होई … अपना से बड़ होखत देख जो दिल से निरेखेहर पल शुभे शुभे…

  • हार हो गई | Haar ho Gai

    हार हो गई ( Haar Ho Gai ) सारी मेहनत बेकार हो गईइस बार भी हार हो गईकोशिश की थी बहुत हमनेमगर बेवफा सरकार हो गई । बड़ी मेहनत से उसको पाया थाबड़ी मुश्किल से करीब लाया थाअचानक वह फरार हो गईकिस्मत फिर दागदार हो गई । पास आकर वो चली गईकिस्मत फिर से छली…

  • ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी

    ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी ढलने लगी धीरे-धीरे जवानीबदलने लगी धीरे-धीरे कहानीभरोसा दिलों का अब घटने लगापिघलने लगी धीरे-धीरे रवानी।। बुढ़ापा बदन पर छाने लगाचांद सा चेहरा मुरझाने लगाचेहरे पर दिखती नही कोई रौनकसचमुच बुढ़ापा अब आने लगा।। वो मौसम दिखे ना फिजाएं दिखेहरी भरी दिलकश हवाएं दिखेदिखता नहीं है जुनून दिल में कोईनजरों में अब…

  • आँसू | Aansoo

    आँसू ह्रदय के हरेक भाव का द्रव भी,बह कर बन जाता है आँसू ।प्यार घृणा करुणा के विरोध का,द्रवित रूप होता है आँसू ।। सभी भावों की अभिव्यक्तियों पर,टपक आँख से जाता आँसू ।मन हँसता तो हँसे है वक्त भी,गिर जाता है आँख से आँसू ।। उसका स्थान नियत है कर डाला,मनुज आँख में बसता…

  • घर का बड़ा बेटा | Ghar ka Bada Beta

    घर का बड़ा बेटा आज टांग कर बैग,वह निकल गया कुछ दूर।घर की देख परेशानी,वह कमाने के लिए हुआ मजबूर। कभी था घर का राजा बेटा,आज हुआ वह नालायक।कमा के पैसा जो देता है,कहलाता है वह बेटा लायक। बहन की शादी करनी है,छोटा है अभी भाई।उसका भी अभी पढ़ना है,अब तो कमाना पड़ेगा भाई। बीमारी…

  • सपनों की तलाश | Sapno ki Talash

    सपनों की तलाश ( Sapno Ki Talash ) हर गली, हर मोड़ पर तेरा नाम पुकारा,तेरे बिना ये जीवन, है अधूरा, है बेसहारा।सपनों की तलाश में हर दिन भटक जाता,तेरे बिना मेरा हर सपना टूटकर रह जाता। तेरी बातों की मिठास, हर लम्हा महकाए,तेरी यादों की गहराई, मेरे दिल को सहलाए।तेरी राहों की ओर हररोज़…