कविताएँ

  • करूं भी तो क्या | Karoon Bhi to Kya

    करूं भी तो क्या हम सबकी जिंदगी भी एक सर्किल की तरह है,इसी में हम सब उलझें और घूमते रहते हैं हरदम।लाइन पर सीधा चलना तुम भी भूले और हम भी,अपने ही कामों में उलझे रहते हैं अब तो हरदम।। हम सबका था रंगीन जीवन अब बेरंग हो गया है,कलर प्लेट में है,या प्लेट कलर…

  • हमने तो | Hamne to

    हमने तो हमने कुछ और ढूँढा था तुझमेंहमने समझा थाप्यार का समन्दर हो तुमख़बर नहीं थीउजड़े सहरा का मंज़र हो तुमहम तो समझे थेकि दिल के ख़ला को भर जाओगे तुमयह ख़बर नहीं थीकि और भी तन्हा कर जाओगे तुमहमने तो कुछ और ढूँढा था तुझमें हम तो समझे थेकि इश्क़ की हक़ीक़त हो तुमयह…

  • मैं कितना बदल गया

    मैं कितना बदल गया नस्लें बर्बाद हो गई हमारी आज के इस व्यवहार में,हर कोई आज बिक गया रिश्वत के इस पुरस्कार में।अपनी पर ध्यान नहीं देते पर पराई पर हम देते रहे,अब वो कहां शिष्टाचार बचा है अपनों के संस्कार में।। हम तो रिश्वत से अपना ख्वाब पूरा करना चाहते हैं,आजकल हम एक दूसरे…

  • मेरे हिस्से का प्रेम

    मेरे हिस्से का प्रेम मैं तुम सेदूर हूँधूप और छाँव की तरहपुष्प और सुगंध की तरहधरा और नील गगन की तरहदिवस और निशा की तरहजनवरी और दिसम्बर की तरहसाथ-साथ होते हुए भीबहुत दूर- बहुत दूर परन्तुप्रति दिन मिलता हूँतुम सेतुम्हारी नयी कविता के रूप मेंनये शब्दों के रूप में जीवन मेंकभी कोई सुयोग बना..तोमैं तुम…

  • अपनी दुनियां | Apni Duniya

    अपनी दुनियां इस दुनिया के भीतर भी अपनी एक दुनिया होनी चाहिएमन के राज वहीं पर खोलना चाहिए इस दुनिया में जिसकी अपनी नहीं होती एक दुनियावह विचरता रहता है भ्रम और जाल मेंदुखी होता रहता है संसार के अंदर लेकिन जिसके भीतर अपनी एक दुनिया होती हैवह सदा मस्त रहता है अपने ही भावों…

  • कोकिला उपवन क्यों न आई

    कोकिला उपवन क्यों न आई कोकिला उपवन क्यों न आईखिली बहारें यहां रुत पतझड़ीकिसलय ने अश्रु बूंदें टपकाईकोकिला उपवन क्यों न आई काली आंखें काला वस्त्रपहन कौन तू देश गईतेरे गीतों तेरी धुनों सेसजी क्या महफिल नईकोमल – कोमल पत्ते डालीचुप थे तुझ बिन न खड़खड़ाएफाख्ता उदास अमलतास पर बैठीउसने पंख न फड़फड़ाएआम्र मंजरी रूठी…

  • ये क्या हुआ

    ये क्या हुआ तू सत्य की खोज में चल मानव,क्योंकि हर तरफ दिख रहा है दानव।। सब एक दूसरे को खाने में लगे हुए हैं,रईस गरीब को सताने में लगे हुए हैं।। मानवता बिकी पड़ी है बाजार में,यह दुनिया फंसी फरेबी मक्कार में।। ये बाप और बेटे रिश्ते भूल गए हैं,बच्चे संस्कार वाले बस्ते भूल…

  • एक बार मनुहार करना जरूर

    एक बार मनुहार करना जरूर नदी की तरह तुम बहना जरुर,सुभावों को नमन करना जरूर। मन का मीत जब मिल जाए,एक बार मनुहार करना जरुर। मनुजता की पहली पसंद प्रेम,जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर। गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर । झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,चाँद संग सितारों…

  • जीवन की कहानी

    जीवन की कहानी जीवन की कहानी अनकही है,हर मोड़ पे एक नयी रहनी है।आंसू और मुस्कान साथ चलते,सपने भी कभी टूटते, कभी पलते। हर दिन नया संघर्ष दिखाता,कभी हलचल, कभी सन्नाटा।हर रात खुद से सवाल करता,क्या खोया, क्या पाया, क्या अब करना। धूप-छांव में ही पलते हैं,राहों में कांटे बिछते हैं।मंज़िल दूर होती है कभी,पर…

  • सात्विक गौरव के है ये पल

    सात्विक गौरव के है ये पल निशांत बच्छावत के 16 वाँ जन्मदिन पर मेरे भाव- पूर्वजों के पुण्य – पुंज और आशिर्वाद के निहितार्थ वात्सल्यमय निशांत के जन्मदिन के शुभ – दिवस पर उसको स्नेहासिक्त जीवन के “प्रदीप “ पाने की शुभकामनाएँ । सात्विक गौरव के है ये पलपुरुषार्थ का मिला जो सुफलव्यक्तित्व द्वय को…