कविताएँ

  • माँ से बना बचपन मेरा

    माँ से बना बचपन मेरा अजब निराला खेल बचपन का lदुनिया ने लिया पक्ष सक्षम का llबचपन ने लिया पक्ष माँ का lआज भी धुन माँ की लोरी की llसुनाओ , फिर से कहानी माँ की lमाँ से बना बचपन मेरा ll किसी ने पूँछा ” मुकद्दर ” क्या है ?मैं ने कहा मेरे पास…

  • सुदेश दीक्षित की कविताएं | Sudesh Dixit Poetry

    आयेगा बुलावा तो जाना पड़ेगा आयेगा बुलावा तो जाना पड़ेगा।माया मोह से हाथ छुड़ाना पड़ेगा। मस्त हो नींद गहरी में होंगे तब हम।तुम्हें बार बार ना हमें बुलाना पड़ेगा। जो मरजी हो बेफिक्र हो करते रहना।सब ये देख हमें दिल ना दुखाना पड़ेगा। गिर जाएंगे जब अपनी ही नज़रों से हम।अपना जनाजा हमें तब खुद…

  • कागा की कलम | Kaga ki Kalam

    खोज जो खोजा वो पाया गोता मार गेहराई में ,सीपों में छुपे है मोती मिले गेहराई में ! बीते दिन जीवन के बेठे रहे किनारे पर ,जब ख़्याल आया खोजने का मिले गेहराई में ! कंगाल कोई नहीं सबके अंदर मोजूद माणक लाल ,डूबने का डर छलांग मारी मिले गेहराई में ! जान का ख़त़रा…

  • भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस

    भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस यह उमर हमारी बीत रहीसत् संगत में रमकरज्ञानामृत का पान कर लेमहावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।नाशवान है काया हमारीक्यों करे मेरी मेरी ।इस तन को राख बननेलगे न इक पल की देरी ।महावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।सबके साथ लगा है भारी ,जन्म –…

  • टी. एस. एलियट की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    टी. एस. एलियट एक प्रमुख अंग्रेजी कवि, निबंधकार, नाटककार, और आलोचक थे, जिनका जन्म 26 सितंबर 1888 को सेंट लुइस, मिसौरी, अमेरिका में हुआ था। 25 साल की उम्र में इंग्लैंड चले गए और वहीं बस गए। उन्होंने 20वीं सदी के आधुनिक काव्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंखें जिन्हें आखिरी बार देखा था आँसुओं…

  • याद न आये, बीते दिनों की

    याद न आये, बीते दिनों की बैठी हूँ नील अम्बर के तलेअपनी स्मृतियों की चादर को ओढेजैसे हरी-भरी वादियों के नीचेएक मनमोहक घटा छा जाती हैमन में एक लहर-सी उठ जाती है।जैसे कोई नर्म घास के बिछौनों परकोई मन्द पवन गुजर जाती हैदेखकर प्रकृति नटी के इस रूप मेंबचपन में की गई शरारतेंफिर से आंखों…

  • शुभ कर्म | भजन

    शुभ कर्म ( Subh Karm ) मानव शुभ कर्म करें , गुणगान गायेंगे।देवत्व करम करें, देवता बन जायेंगे।।टेक।। सूरा जो पियेगा तो, सूअर बन जायेगा।शहद मीठा खायेगा ,स्वाद मीठा आयेगा।दर्पण में छाया हो, वही दिखलायेंगे।।1।। आग में हाथ डाले तो, जल ही जायेगा।सागर में जो गिरे, वह डूब ही जायेगा।कुआं में बोलोगे, वही बतलायेंगे।।2।। बिच्छू…

  • आंचल छांव भरा | Aanchal Chhanv Bhara

    आंचल छांव भरा ( Aanchal Chhanv Bhara ) हो गर साथ उसका तो तू क्या मिटा पायेगा।ख़ाक हो जाएगा तिरा अहम् तू निकल ना पायेगा। दर्द , ज़ख्म हैं पोटली में उठा और जिये जा।रिसते ज़ख्मों को भला कहां तू दिखा पायेगा। आंचल छांव भरा चला गया साथ मां के।ममता का साया तू अब कहां…

  • मुझे बच्चा ही रहने दो

    मुझे बच्चा ही रहने दो क्या कोई मेरा दर्द जानेगामेरी पीड़ा को पहचानेगासबसे पहले तो आप सब को नमस्तेतीन साल की उमर से टंगे भारी बस्तेपापा और मम्मी के सपनो के वास्तेरोज परीक्षा और परिणाम की टेंशनपड़ोसी बच्चो के आगे निकल जाना होता मेंशनस्कूल और परिवार का फर्स्ट आने का दबाबकौन देगा मेरे बचपन का…

  • बच्चे | Bache

    बच्चे ( Bache ) नन्हें-मुन्ने प्यारे-प्यारे, होते सबके दुलारे,बच्चे ही हमारे घर, आँगन की शान हैं। भाषा वो दुलारी लगे, सबको है प्यारी लगे,बोलती जो तुतलाती, बच्चों की जुबान है। है आज का दिवस जो, कहाता बाल दिन है,चौदह है नवंबर, आज बाल गान है। कोई धैर्यवान होता, कोई वीरवान होता,सीधा सादा होता कोई, बहुत…