कविताएँ

  • बचपन का प्यार

    बचपन का प्यार जब मैं 8 साल का था तब मुझे पहली बार प्यार हुआ।उसने मुझको मैंने उसको देखा आँखों से इकरार हुआ। बचपन में तब मैं कितना भोला कितना नादां था,इसे प्यार कहते हैं यह भी नहीं समझता था। मैं अपनी चॉकलेट उसको खाने को देता,उसकी झूठी पेस्ट्री भी बड़े शौक से लेता। उसकी…

  • क्या खूब दिन थे!

    क्या खूब दिन थे! बड़ा मजा आता था बचपन में,खलिहान हमारा घर हो जाता,सुबह से लेकर रात तक,मस्ती ही मस्ती सुहाती! धान की सटकाई,पोरे की बँधाई,आटा सारे बँध जाने पर,पुआल का गाझा बनता! शाम पहर धान के गट्ठर पर,गोबर का पिण्ड रखा जाता,सांझ के दीपक से,मॉ अन्नपूर्णा को पूजा जाता! खलिहानों में दोपहर में,महिला मजदूरों…

  • बच्चे देश का भविष्य

    बच्चे देश का भविष्य हे बच्चे मन के सच्चे सारी जग की आंखों के तारे बच्चे आने वाले कल का सुंदर भविष्य है बच्चे ही नव भारत का निर्माण करेंगे बच्चों को ना मंदिर मस्जिद में उलझाऐगे धर्मनिरपेक्षता का ज्ञान कराओ मिलजुलकर त्यौहार मनाए शिक्षा को आधार बनाकर नवनिर्माण कराएं यही तो अंबेडकर, गांधी ,अब्दुल…

  • मेरा गांव | Mera Gaon

    मेरा गांव ( Mera Gaon ) सबका दुलारा मेरा गांव ।सबका प्यारा मेरा गांव ।थका हारा जब भी आऊं ।मुझको सहारा देता गांव । कितने ही देखे इसने बसंत ।ना था जिनका कोई अंत ।सबकी पीड़ा छुपाए सीने में ।सब पे प्यार लुटाता मेरा गांव । पीपल बरगद पहचान है इसकी ।कुआं बावड़ी सब जान…

  • शालिग्राम तुलसी कहलाई हूॅ

    शालिग्राम तुलसी कहलाई हूॅ विष्णु की अनुयायी हूँ,मैं वृन्दा तुलसी माई हूँ।टेक वरों की माता हूँ,भाग्य विधाता हूँ।सुख की दाता हूँ,मैं रज रक्षक सबकी,भाग्य भव दाता हूँ ।हर भवन में आई हूँ,विष्णु की अनुयायी हूँमैं वृन्दा तुलसी माई हूँ।।1। दैत्य कुल में जन्मी,हरि कीर्तन की धुनी,त्रिभुवन बंदन में रमी,पतितों की हूँ तारिणी।सत्य सतीत्व को पहनीलक्ष्मी…

  • डॉ. बीना सिंह “रागी” की कविताएं | Dr. Beena  Singh Raggi Poetry

    विनम्र श्रद्धांजलि मधुर सपने लेकर पहलगाम आए सैलानीबुन रहे थे सपनों की चादर गढ़ रहे थे अपनी प्रेम कहानीहिम मंडित पर्वत के छांव पहलगाम मेरा प्यारामोहब्बत करने वालों को लगा यह सदा ही न्यारापर यह कया धमाकों से थर्राई कश्मीर की धरागूंज उठी चीख़ यह तो लाल है मेरा है हरापल भर में सुहाने सपने…

  • श्रीमती उमेश नाग की कविताएं

    सुनो है‌! मेरी राधा रानी, सुनो है‌! मेरी राधा रानी,तुम बिन मेरा नही कोई साथी।मौसम चाहे कैसा भी हो,सभी प्राकृतिक समय कामैं ही कर्ताधर्ता।सावन भादो न ही सही,अभी पोष माह का जोर-सहना होगा।हम तुम मिलकर समस्त,जग वासीयों का शिशिर सेबचाव करना होगा।सभी प्राणी चर अचर, मानवएवं प्रकृति का रक्षण करना होगा।मैं ही जगतपिता हूं,सर्व ब्रम्हांड…

  • वृक्ष हमारे तुम संरक्षक हो

    वृक्ष हमारे तुम संरक्षक हो वृक्ष हमारे तुम संरक्षक होहरे भरे हो खड़े हो सीना ताने।भव्य शस्यश्यामल है रूप तिसारा,लगते कोई हमारे शुभ चिंतक हो।घने घने हरे भरे पत्तों से सुशोभित,थलचर -नभचर को आश्रय देते-हो।शीतल छांव तुम्हारी देती आश्रय,हर प्राणी हर चर अचर को।सकल ब्रम्हांड में हो जय जयकार तुम्हारी,वृक्ष तुम मित्र हो, है तुम्हारी…

  • आंवला नवमी दिवस

    आंवला नवमी दिवस आंवले के वृक्ष की छांव में, सुख की अनुभूति पाए,हर शाख इसकी वंदना करें, आरोग्य का संदेश ये लाए। धरा का ये अनमोल वर, गुणकारी अमृत कहलाए,सर्दियों की पहली दस्तक में, नवमी पर्व मनाए। सौंदर्य और सेहत का, अनोखा संगम लाए,शारीरिक बल और आरोग्य का आशीर्वाद दिलाए। आंवले के रस का रसिक,…

  • चाय के घूंट | Chai ke Ghoont

    चाय के घूंट ( Chai ke ghoont ) चाय के गौरव का क्या कहना,नाम आते ही चेहरे पर शबाब आया।पिलाने वाले साकी की बातनही टाली जाती,करके तौबा इसे पीली जाती है।नीलगिरी की वादियों में हैं,चाय के बागान।सुहाना था इसकी आन‌ शान,रहें थे इक‌ दिन हम इस बाग के –आशियाने में।देखें सुबह की धुंध,बालकनी पर दो…