कविताएँ

  • चांद तू जल्दी आना | Karwa Chauth Special

    चांद तू जल्दी आना ( Chand tu jaldi aana : Karwa Chauth Special )   चांद तुम जल्दी आना रस सुधा बरसाना धवल चांदनी प्यारी चांद लगे सुहाना   सोलह सिंगार गोरी प्रीत की बांधती डोरी पावन चौथ का व्रत प्यार पिया का पाना   खुशियों से भर देना आशीष अपार देना जिंदगी में भरो…

  • ग़रीब स्त्री का करवाचौथ | Karva chauth poem

    ग़रीब स्त्री का करवा चौथ ( Garib stree ka karva chauth )     सुबह से भूखी-प्यासी रहकर ही पहनकर फटे-पुराने चीर, करती बेसुहाता-सा हार-श्रृंगार, अनमने मन से काम पर चली जाती, दिन भर दौड़-धूप करती फिर दोपहर बाद ही घर चली आती।   घर आकर बच्चों और सास-ससुर को खाना खिलाती, पुनः सज-संवरकर शाम…

  • करवा चौथ | Karwa Chauth kavita

    करवा चौथ ( Karwa Chauth ) ( 3 )  मेरे जीवन की चांदनी, तुझको लगता हूं चंद्र प्रिये। रोम रोम में स्नेह रश्मियां, भीगी सुधारस रंध्र प्रिये। दिल से दिल के तार जुड़े, सुरों का संगम भावन हो। मैं मनमौजी बादल हूं, तुम मधुर बरसता सावन हो। सौम्य सुधा सुधाकर पाओ, करती हो उपवास प्रिये।…

  • जटायु राज | Kavita

    जटायु राज ( Jatayu raj )   रावण मारीच को संग ले पंचवटी में जाता है मायावी बाबाजी बनकर सीता हर के लाता है   कोई प्राण बचा लो मेरे मेरी करूण पुकार सुनो आकर रक्षा करो हमारी धरा गगन जहान सुनो   स्वर सुन सीता माता का पक्षी राज जटायु आया रे दुष्ट क्या…

  • मै नारी हूँ | Main Nari Hoon Kavita

    मै नारी हूँ ( Main nari hoon : Poem on nari ) ( 2 ) पुरुषों के समाज में अबला कहलाने वाली बेचारी हूं, सब कुछ सहकर चुपचाप आंसू बहाने वाली मैं नारी हूं। पुरुष को जन्म देने से मरण तक देती हूं साथ पुरुष का, उस वक्त भी होती जरूरी प्रदर्शन होता जब पौरुष…

  • शरद पूर्णिमा | Sharad Purnima Kavita

    शरद पूर्णिमा ( Sharad purnima poems in Hindi ) ( 5 ) नदियों बहती मीठी सुरभित धार, चाँद की छवि में बसा है संसार। शरद की पूर्णिमा का सिर्फ सार छलके प्रेम का अद्भुत त्यौहार। खुशियों की बौछार, मन में उमंग, शरद की पूर्णिमा है मौसम की तरंग। प्रकृति की गोद में सब कुछ है…

  • रण में केशव आ जाओ | Kavita

    रण में केशव आ जाओ ( Ran mein keshav aa jao )   चक्र सुदर्शन धारण करके अब रण में केशब आ जाओ जग सारा लड़ रहा अरि से विजय पताका जग फहरावो   साहस संबल भरके उर में जन जन का कल्याण करो सब  को  जीवन  देने वाले माधव  सबके  कष्ट  हरो   हर…

  • उठो पार्थ | Geeta Saar Kavita

    उठो पार्थ ( Utho parth : Geeta Saar ) उठो पार्थ अब बाण उठाओ,पापी का संघार करो। धर्म धार कर कुन्ती नन्दन, पुनः धर्म आधार धरो।   चढा प्रत्यचा गाण्डीव पे तुम,रक्त बीज निसताप करो, मोह त्याग कर शस्त्र उठाओ,भारत का संताप हरो।   याद करो तुम द्रुपद सुता के,खुले केश अंगार नयन। वस्त्रहरण का…

  • स्त्री | Stree Kavita

    स्त्री ( Stree kavita )   स्त्री होकर स्त्री पर उपहास करती हो, हैरानी होती है कि तुम तुच्छ विचारों में वास करती हो। तुम भी उस तरुवर की शाखा हो, जिस डाल कि मैं। तुम भी अपने कार्य में निपुण, मैं भी अपने कार्य में संपूर्ण। स्त्री होकर स्त्री पर उपहास करती हो, हैरानी…

  • ओस की बूंदे | Kavita

    ओस की बूंदे ( Os ki boonde : Kavita )   सोनू!मेरी जिंदगी हो तुम वर्षों की मेरी तलाश हो तुम बारिश की बूंदों में तुम हो कुदरत की करिश्मा हो तुम खुशी की आँसू हो तुम तिनकों में चमकती ओस की बूंदे हो तुम मनकों में दमकती हीर हो तुम फूलों की परागकण हो…