कविताएँ

  • भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का

    भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का साथ दूंगा मैं हर लम्हा देश का !भक्त हूँ मैं देख ऐसा देश का ख़ून से सींचा वतन हर सैनिक नेहै बना तिरंगा चेहरा देश का छोड़ कर मां बाप सब भाई बहनहाँ निभाता सैनिक वादा देश का लहराना तिरंगा अदू की छाती परगा रहा है दिल ये…

  • न्याय की पुकार

    न्याय की पुकार उपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला,अपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला। सालों से होते ज़ुल्मो सितम ग़रीबों से,ग़रीब को आज तक न्याय नहीं मिला। सुनते नहीं पुकार कानों में ठोंसा कपास,शोषित को आज तक न्याय नहीं मिला। बहिन बेटियों से होते बलात्कार सरे आम,अछूत को आज तक न्याय नहीं मिला।…

  • तुम हो मां

    तुम हो मां मेरी गीता,मेरी कुरान तुम हो मां,इस सिमटी हुई जमीन का खुला आसमान तुम हो मां। बुझी हुई जिंदगी का रोशन चिराग तुम हो मां,मेरी ईद का चांद,मेरी दीवाली की शाम तुम हो मां। तपती धूप में ठंडा अहसास तुम हो मां,दूर रहकर भी हरपल पास तुम हो मां। जब होती हूं उदास…

  • मरने भी नहीं देते

    मरने भी नहीं देते वो देते हैं ज़हर मुझको मगर मरने भी नहीं देते,बनाते हैं ताबूत, मेरी लाश बिखरने भी नहीं देते। करूं मैं प्यार सिर्फ उनसे ये भी तो ज़िद्द है उनकी,वो ज़ाहिर इश्क मुझको मगर करने भी नहीं देते। वो देते रहते हैं ज़ख्म पे ज़ख्म मेरे इस सीने पर,मगर इन ज़ख्मों को…

  • दिव्य संत

    दिव्य संत ->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||1.प्रेम है आनंद है,श्री राधा कृष्णा संग हैं |तन-मन-धन-स्वांस,सब कुछ परमानंद हैं |लता-पता-रज-व्रज गलियां,वो स्वयं वृंदावन हैं |दिव्य अलौकिक संत महराज,नाम प्रेमानन्द है |->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा || 2.राधा कृष्णा-जन सेवा,यही उनकी पूंजी है |सबके मार्ग दर्शक हैं,प्रभु भक्ती की कुंज्जी है |कई वर्षों से…

  • अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry

    अमलतास चुपचाप झरता है अमलतास,जैसे पीली चूड़ियाँगिर रही हों किसी दुल्हन की कलाई से। गाँव की पगडंडी परजब धूप भी सो रही होती है,तब वहरंग भरता है उदासी में। न फूलों का शोर,न ख़ुशबू का घमंड—बस पीली परतों मेंएक ऋतु की मुस्कान ओढ़ेवह खड़ा रहता है। लड़कियाँ उसके नीचेखेल जाती हैं ब्याह-बनाव की कल्पनाएँ,बुजुर्ग उसकी…

  • ये गूंगी शाम

    ये गूंगी शाम ये गुंगी शाम मेरे कानों में कुछ कहती है, तु है कहीं आसपास ये अहसास मुझे दिलाती है,बेशक तू मुझे छोड़ गया, वादा अपना तोड़ गया, किया था वादा तूने ता-उम्र साथ निभाने का, हर ग़म मेरा बांट कर मुझे खुशी के फूलों की लड़ियां दिखाने का, दे गया तू ग़म उम्र-भर…

  • जीवन-भाग-2

    जीवन-भाग-2 हारना कब जितनाकब मौन रखना कबबोलना कब संतुलितहोंना कब विनम्रतापूर्वकपेश आना आदि – आदितब कहि जाकर हमइस जीवन रूपी नोकाको पार् पहुँचाने कीकोशिश कर सकते हैअतः हमनें आवेश मेंअपने आप को समनही रखा और अनियंत्रितहोकर बिना सोचें आक्रमकहोकर कुछ गलत सब्दोंका प्रयोग कर दिया तोइस जीवन रूपी नोका कोटूटने से वह डूबने से कोईभी…

  • जीवन-भाग-1

    जीवन-भाग-1 हम अपने जीवन मेंचले जा रहें है कोईदौड़े जा रहे तो कोईदिशाहीन से भटक रहे हैआखिर हम सब जाकहां रहे हैं? मंज़िल कीतलाश है राह दिखती नहींराह तो है पर मंजिलनिश्चित नहीं राह औरमंज़िल दोनों है पर गति नहींआखिर क्या करे ?कैसी ये पहेली है किजीवन जीते सब हैंपर विरले ही जीवनअपना सार्थक जीते…

  • प्रदीप छाजेड़ जी की रचनायें

    ध्यान (Meditation) की शक्ति भारतीय संस्कृति का दर्शन कहता है कि जीवन का सार अपने भीतर की सच्चाई को खोजना है । वह इसके लिए हमको दैनिक कार्यक्रम को भी उस ओर मोड़ना जरूरी है । आज हर कोई बाहर की दुनिया को आकर्षक बनाने में लगा है । वह तन से लेकर सदन सभी…