जीवन-भाग-1

जीवन-भाग-1

हम अपने जीवन में
चले जा रहें है कोई
दौड़े जा रहे तो कोई
दिशाहीन से भटक रहे है
आखिर हम सब जा
कहां रहे हैं? मंज़िल की
तलाश है राह दिखती नहीं
राह तो है पर मंजिल
निश्चित नहीं राह और
मंज़िल दोनों है पर गति नहीं
आखिर क्या करे ?
कैसी ये पहेली है कि
जीवन जीते सब हैं
पर विरले ही जीवन
अपना सार्थक जीते हैं
जिंदा तो दीखते है पर
बेज़ान से नज़र आते है
जबकि हमारा यह
जीवन हैं एक नोका
जब हम प्रसन्न होतें हैं
तो मन ही मन भावों
से सही से गुनगुनाने
लगतें हैं लेकिन यह
अनुभव हम अपना
स्वयं ही सही से
जान पाते हैं अतः हमें
कब किस के सामने

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कलयुग के राम खंड पर | Kalyug ke Ram Khand par

    कलयुग के राम खंड पर ( Kalyug ke Ram khand par )   कलयुग के राम खंड पर,आरंभ अब प्रचंड कर स्व प्रज्ञित अग्र कदम, अंतरतम दृढ़ संकल्प । आज्ञा अनुपालन शिरोधार्य, श्रम निष्ठ ध्येय प्रकल्प । नित गमन सत्य पथ, अवरोध बाधा खंड खंड कर । कलयुग के राम खंड पर,आरंभ अब प्रचंड कर…

  • अपनत्व दिखावा तो नहीं | Apnatva par kavita

    अपनत्व दिखावा तो नहीं ( Apnatva dikhawa to nahi )   अपनापन अनमोल भाई कोई दिखावा तो नहीं। अपनों से परिवार सुखी कोई छलावा तो नहीं। अपनो की महफिल में महके खिलते चमन दिलों के। दिखावे की दुनिया में मिलते कदम कदम पे धोखे। घट घट प्रेम सरिताएं बहती पावन प्रेम की रसधार। सुख आनंद…

  • प्रवास

    प्रवास   अश्रुधारा हृदय क्रंदन दहन करता। प्रिय तुम्हारा प्रवास प्राण हरन करता।।   नभ में देखा नीड़ से निकले हुये थे आंच क्या थोड़ी लगी पिघले हुये  थे, उदर अग्नि प्रणय पण का हनन करता।।प्रिय०   तुम कहे थे पर न आये क्या करूं मैं इस असह्य विरहाग्नि में कब तक जलूं मैं, कांच…

  • इंसानियत खो गई | Insaniyat Kho Gayi

    इंसानियत खो गई ( Insaniyat Kho Gayi ) बिछुड़न की रीति में स्वयं को पहचाना भीडतंत्र में बहुत प्रतिभावान हूँ जाना ।।1। नयन कोर बहते रहे शायद कभी सूखे राधा का चोला उतार पार्वती सरीखे ।।2। तुम गए ठीक से, पर सबकुछ ठीक क्यूँ नहीं गई इरादे वादे सारे तेरे गए पर याद क्यूँ नहीं…

  • मधु | Madhu par kavita

     मधु  ( Madhu )    शहद बडी गुणकारी…..|| 1.शहद बडी गुणकारी, रहतीं दूर अनेक बिमारी | अमृत सा गाढा मीठा द्रव्य, कुदरत की कलाकारी | मधु की रचना मक्खी करती, फूलों से रस लेकर | फूलों को खुश कर देतीं हैं, मीठी सी बातें कहकर |  शहद बडी गुणकारी…..|| 2.शहद से निकले छत्ते को, मोम…

  • दादी माँ की मन्नत | Kavita Dadi Maa ki Mannat

    दादी माँ की मन्नत ( Dadi maa ki mannat )    माॅंगी जो हमनें मन्नत एक, रखना ईश्वर हम सबको एक। यह बैर किसी से हो नही पाएं, प्रेम-भाव से रहे हम सब सारे।। जैसे गुज़रें है अब तक दिन, आगे भी गुज़रें ऐसे ही दिन। सब कुछ दिया है आपने ईश्वर, आगे भी कृपा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *