कविताएँ

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

  • पहली बारिश | Kavita

    पहली बारिश   ( Pehli Baarish )   बचपन की यादों को समेट रही हूं पहली बारिश की यादे सहेज रही हूं बारिश का पानी सखी सहेली कागज की नाव छपाक सी मस्ती बेफिक्र ज़माना वक्त सुहाना हौले हौले से सपने भीग जाना पिता की मुस्कान मां को चिंता पहली बारिश का अहसास अनोखा ना…

  • कुछ अनकही बातें | Kuch Ankahee  Baatein

    कुछ अनकही बातें (Kuch Ankahee  Baatein )   कुछ अनकही बातें, कुछ पुरानी यादें कहां से आती हैं कहां चली जाती हैं कुछ नही समझ आता क्या होता हैं कभी कभी। कुछ अनजान रास्ते और अनजान राहे जाना कहां हैं समझ नही आता बीच राह मैं खड़े खड़े मन बड़ा घबराता रास्ते पर खड़े खड़े…

  • पानी थोड़ा कम है | Poem Pani Thoda Kam hai

    पानी थोड़ा कम है ( Pani thoda kam hai )     उम्मीदों  के  भरे  कलश  में, पानी  थोड़ा  कम  है।   भरते  भरते  जीवन  बीता,  फिर भी थोड़ा कम है।   पाने  की  चाहत  में  तुमको,  बीता  ये  जीवन  है।   फिर भी तृष्णा कम ना हुई, लगता है थोडा कम है।   कवि : …

  • दीप जलाने होंगे | Kavita

    दीप जलाने होंगे ( Deep jalane honge )   दीप  जलाने  होंगे  जोत जलानी होगी शारदे दरबार तेरे अलख जगानी होगी   सिर पर रख दो हाथ मां भर दो भंडार मां शब्द सुमनहार मैया कर लो स्वीकार मां   वीणा वरदायिनी मोहक सुभाषिनी बुद्धि विधाता वाणी मां प्रज्ञादायिनी   लेखनी में भाव भर शब्द…

  • महारानी लक्ष्मी बाई | Maharani Laxmi Bai Par Kavita

    महारानी लक्ष्मी बाई ( Maharani Laxmi Bai )   आजादी की चिंगारी थी बैरियों पर भारी थी गोरों के छक्के छुड़ाए लक्ष्मी वीर नारी थी   तेज था तलवारों में ओज भरा हूंकारों में रणचंडी पराक्रमी हजारों पर भारी थी   क्रांति काल की कहानी वो झांसी की महारानी बिगुल बजाया रण का राष्ट्र पुजारी…

  • मेरा बचपन | Poetry On Bachpan

    मेरा बचपन ( Mera bachpan)   वो रह रह कर क्यों याद आता है मुझे वो मेरा बचपन जो शायद भूल मुझे कहीं खो गया है दूर वो मेरा बचपन… वो पापा की बातें मम्मी का झिड़कना इम्तिहान के दिनों में मेरा टीवी देखने को ज़िद करना…. कितना मासूम था भोला था वो कितना न…

  • आओ चले योग की ओर | Kavita

    आओ चले योग की ओर ( Aao chale yoga ki ore )   आओ चले योग की ओर आओ चले योग की ओर तन  मन  अपना चंगा होगा सेहत रहेगी सिरमौर   व्याधि  बीमारी  महामारी हाई-फाई हो रही भारी शुगर बीपी का मचे शोर आओ चले योग की ओर   संतुलित  सुखकर्ता  जीवन  में हर्ष…

  • हम कठपुतली है ईश्वर की | Geet Hum Kathputli

    हम कठपुतली है ईश्वर की ( Hum kathputli hai Ishwar ki )   सारी दुनिया रंगमंच है खेल वही दिखलाएगा हम कठपुतली है ईश्वर की चाहे जिसे नचायेगा नीली छतरी वाला बैठा डोर वही हिलाएगा न्यारे न्यारे दे किरदार अभिनय खूब कराएगा हमको रोल निभाना प्यारे बाजीगर खेल दिखाएगा हम कठपुतली है ईश्वर की मर्जी…

  • जामुन | Jaamun Par Kavita

    जामुन  ( Jaamun )   देखो काली-काली जामुन  भाए डाली डाली जामुन l  कुछ पक्की कुछ कच्ची जामुन  कुछ मीठी कुछ खट्टी जामुन l  गुच्छे में खूब लटक रही है बच्चों को खूब खटक रही है l कुछ काली कुछ लाल हरी लेकिन जामुन खूब फरी  l बच्चे चढ़कर तोड़ रहे हैं कुछ बीन रहे…