कविताएँ

  • कोरोना पर दोहे | Corona par dohe

    कोरोना पर दोहे ( Corona par dohe )   समय चक्र का खेल नया, कोरोना  की  चाल। अर्थव्यवस्था चौपट हुई, जनजीवन  बदहाल ।   सारे घर में बंद हुए, लक्ष्मण रेखा भीतर । सामाजिक दूरियां ही, कोरोना का उत्तर।।   लॉक डाउन का पालन, सारे मिलकर करें। जान सबको प्यारी है, सभी मिल परवाह करें…

  • भोर की किरण | Kavita

    भोर की किरण ( Bhor ki kiran )   भोर की पहली किरण उर चेतना का भाव है उषा का उजाला जग में रवि तेज का प्रभाव है   आशाओं की जोत जगाती अंधकार हरती जग का जीने की राह दिखाकर उजियारा करती मन का   कर्मवीरों की प्रेरणा हौसलों की उड़ान है योद्धाओं की…

  • कुंडली | Kundali par Kavita

    कुंडली ( Kundali )   आम जनता झेल रही विकट समय की मार कोरोना ने कर दिया जग का बंटाधार जग का बंटाधार कहर कोरोना बनकर डसता जहरी नाग कालिया जन को तनकर कह सोनी कविराय जगत का जीना हराम कैसी आई लहर संकट में पिसता आम   कवि : रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू (…

  • कोरोना का सीजन | Kavita

    कोरोना का सीजन ( Corona ka season )   कोरोना का सीजन कोरोना का सीजन बढ़े रोग दिन दिन घटे ऑक्सीजन कोरोना का सीजन…….2 मार्च में आए अप्रैल में छाए पूरी मई यह तबाही मचाए जून में जाने की करे डिसीजन करोना का सीजन……. जुलाई में जोर भयो कमजोर अगस्त में गश्त बची अब थोर…

  • मैं नहीं हम की बात | Kavita

    मैं नहीं हम की बात ( Main Nahi Hum Ki Baat )     करें बंद अब,धरम की बातें। गंगा और जमजम की बातें।   चोटिल हैं ज़ज्बात अभी बस, करें  फकत  मरहम की बातें।   भूख प्यास विश्वास की बातें, बोझिल हर इक,साँस की बातें।   मिलजुलके सुलाझायें मसले, करें  ताल  कदम की बातें।…

  • कोरोना काल का पक्ष एक और | Kavita

    कोरोना काल का पक्ष एक और! ( Corona Kal Ka Pach Ek Or )   जरा सोचें समझें कैसा है यह दौर? भविष्य हमारा किधर जा रहा है? देखो कोई चांद पर मंगल पर बस्तियां- बसा रहा है! उधर हम देख सोच भी नहीं पा रहे हैं हम अनजाने डर से डरे जा रहे हैं…

  • आपस में रखें भाईचारा | Bhaichara par Kavita

    आपस में रखें भाईचारा ( Aapas me rakhe bhaichara )   उत्तम यही है विचार धारा बेबस बेकशों का सहारा सदियों से यही हमारी रीति हमें चाहिए सबकी प्रीति इसी ध्येय ने दिया था- वासुधैव कुटुंबकम् का नारा विश्व एक परिवार था हमारा है और रहेगा भी विश्वास है इतना ज्यादा! इन चंद हवा के…

  • खरीद खरीद कर थक गया हूं | Kavita Khareed Khareed kar

    खरीद खरीद कर थक गया हूं ( Khareed khareed kar thak gaya hoon )   सेनेटाइजर खरीदा खरीदा आक्सीमीटर मास्क साथ में हैण्डवाश लाया आयुष काढ़ा तब जबकि आमदनी हुई आधा पीया गिलोय तुलसी का रस नारियल पानी भी ठसम ठस कभी पैरासिटामोल तो कभी खरीदा मल्टी विटामिन कभी डेक्सामेथासोन एजीथ्रोमाइसीन । टीवी अखबार में…

  • हे नाथ बचा लो | Kavita

    हे नाथ बचा लो ( He nath bacha lo )   जग के सारे नर नारी रट रहे माधव मुरलीधारी यशोदा नंदन आ जाओ मोहन प्यारे बनवारी   चक्र सुदर्शन लेकर प्रभु नियति चक्र संभालो कहर कोरोना बरस रहा आकर नाथ बचा लो   उठा अंगुली पर गोवर्धन बचा लिया गोकुल को हर लो पीर…

  • मुक्तक | Muktak

    मुक्तक ( Muktak )   1 सच जो लिख न सके वो कलम तोड़ दो, ये सियासत का  अपने  भरम  तोड़ दो, इन गुनाहों   के  तुम  भी  गुनहगार  हो, यार सत्ता  न  संभले  तो  दम  तोड दो।। 2 भटक रहा हूँ मैं अपनी तिश्नगी के लिए.. ज़रूरी हो गया तू मेरी जिन्दगी के लिए.. फक़त…