कविताएँ

  • मिली नई जिंदगी | Kavita

    मिली नई जिंदगी ( Mili Nayi Zindagi )   बचते बचते बचा हूं मैं, सजते सजते बचा हूं मैं। शुक्र है मौला इलाही तेरा, टाल दिया जो अभी बुलावा मेरा। जिंदगी बख्श दी जिंदगी की खातिर, वरना यह समाज है बहुत ही शातिर! फायदे को अपने बनाए सारे कायदे, जीते जी जो ना निभा सके?…

  • घड़ी | Bal kavita

    घड़ी ( Ghadi )   टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती इसके भीतर अलग-अलग तीन छड़ी घूमतीं सेकेंड, मिनट, घंटे से जो समय तोलतीं टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती । बच्चों झटपट हो जाओ तुम सब तैयार मात-पिता, बड़ों को करो नमस्कार जल्दी पहुँचो स्कूल-तुमसे ये घड़ी बोलती शिक्षा ही सबकी उन्नति…

  • जगतगुरु आदि शंकराचार्य | Kavita

    जगतगुरु आदि शंकराचार्य ( Jagadguru Adi Shankaracharya )    धर्म और संप्रदाय पर जब था अंधकार का साया,  तब केरल के कालडी़ मैं जन्मे महान संत| 8 वर्ष की उम्र में सन्यासी बने सबको दिया ज्ञान,  कई ग्रंथ  रचकर  दिया सबको परम ज्ञान| सनातन धर्म स्थापित किया, अद्वैत चिंतन को पुनर्जीवित करके सनातन हिंदू धर्म…

  • तुम्हें मनाने आया हूं | Prarthana

    तुम्हें मनाने आया हूं ( Tumhe manane aaya hun )   दीन दयाल दया के सागर तुम्हें   मनाने   आया  हूं शब्दों के मोती चुनकर फूल  चढ़ाने  लाया  हूं   हे  जग  के करतार सुनो केशव माधव दातार सुनो करुणा के सागर आप प्रभु अब दीनों की पुकार सुनो   कुछ चमत्कार हरि कर दो दूर …

  • मेरी माँ | Meri Maa Par Kavita Hindi Mein

    मेरी माँ ( Meri Maa ) ( 3 )  दर्द भी दवा बन जाती है, तेरे पास आकर, रोती आँखें भी मुस्काती है, तेरे पास आकर, मंज़र-ए-क़यामत है,आँचल में तेरी ठंडी हवा, क्योंकि जन्नत भी रुकती है, तेरे पास आकर, कैसे बताऊँ किस कदर मोहब्बत है तुमसे माँ, ज़िंदगी भी ज़िंदगी लगती है, तेरे पास…

  • आंचल की छांव | Kavita Aanchal ki Chhaon

    आंचल की छांव ( Aanchal Ki Chhaon )   वात्सल्य का उमड़ता सिंधु मां के आंचल की छांव सुख का सागर बरसता जो मां के छू लेता पांव   तेरे आशीष में जीवन है चरणों में चारो धाम मां सारी दुनिया फिरूं भटकता गोद में तेरे आराम मां   मेरे हर सुख दुख का पहले…

  • प्यारी माँ | Pyari Maa Kavita

    प्यारी माँ ( Pyari Maa )   ये जो संचरित ब्यवहरित सृष्टि सारी है। हे !मां सब तेरे चरणों की पुजारी है।।   कहां भटकता है ब्रत धाम नाम तीर्थों में, मां की ममता ही तो हर तीर्थों पे भारी है।।   दो रोटी और खा ले लाल मेरे खातिर, भूखी रहकर भी कईबार मां…

  • मां | Maa Par Kavita

    मां ( Maa )   मां सहेली भी है, मां पहेली भी है, इस जहां में वो, बिल्कुल अकेली भी है। दुःख में हंसती भी है, सुख में पिसती भी है, नेह की प्यास में , ममता रिसती भी है, मां सुहानी भी है, मां कहानी भी है, मन को शीतल करे, मीठी वाणी भी…

  • बचपन के दिन | Kavita

    बचपन के दिन  ( Bachpan ke din )   कितने अच्छे थे – वे बचपन में बीते पल, ना भविष्य की चिंता, ना सताता बीता कल; खेल-खेल  में  ही  बीत  जाता  पूरा  दिन, कोई तो लौटा दे मुझे-मेरे बचपन के दिन !   नन्हीं आंखों में बसती थी- सच्ची प्रेम करुणा हमारे हिय के मद…

  • हे गगन के चन्द्रमा | Kavita

    हे गगन के चन्द्रमा ( He gagan ke chandrama )   तुम हो गगन के चन्द्रमा, मै हूँ जँमी की धूल। मुझको तुमसे प्रीत है, जो बन गयी है शूल। तेरे बिन ना कटती राते, दिल से मैं मजबूर, हे गगन के चन्द्रमा, तू आ जा बनके फूल।   रात अरू दिन के मिलन सा,क्षणिक…