कविताएँ

  • शिक्षण सेवा के २१ वर्ष

    शिक्षण सेवा के २१ वर्ष ****** ख़ुशी का है दिन आज- मना लो खुशी, आज ही के दिन हुई थी- तुम्हारी नियुक्ति। ली थी तुमने- पद , गोपनीयता , सेवा की शपथ, खायी थी कसम होगे न पथ भ्रष्ट। आज २१वीं बरसी पर दिल पर हाथ रख- पूछो अन्तर्मन से कुछ सवाल, इन वर्षों में,…

  • अन्नदाता

    अन्नदाता   क्यूँ ! तुम जान लेने पर आमादा हो इन बेकसूर और भोले भाले किसानों की ये अन्नदाता ही नहीं है, देश की रीढ़ भी है ये ही नहीं रहेंगे तो देश कैसे उन्नति करेगा……!   ये तो यूँ भी मर रहे हैं कर्ज़ तले दब कर कभी फाँसी, कभी ज़हर, कभी ऋण कभी…

  • जज्बातों की आंधी

    जज्बातों की आंधी ***** जब चलती है वेदी पर उसके बहुत कुछ जल जाती है। वेग उसकी होती अथाह, पल में सब-कुछ कर देती तबाह। रौंद डालती सब-कुछ, विशाल और क्षुद्र। दिखता न उसको- सही और ग़लत, मिले जो कुछ पथ में- उठाकर देती है पटक! शांत वेग जब होता, सामने कुछ न होता। बिखरे…

  • वक़्त

    वक़्त ** वक़्त ने वक़्त से जो तुझको वक़्त दिया है, हृदय पर रखकर हाथ बोलो- साथ तूने उसके क्या सुलूक किया है? कभी गंवाए हो बेवजह- नहीं कभी सुनी उसकी, ना ही की कभी कद्र ही; यूं ही तेरे पांव से जमीं नहीं खिसकी। पढ़ाई के दौर में लड़ाई में रहे व्यस्त, देखो कहीं…

  • आ जा कि दिल उदास है | Udas poetry

    आ जा कि दिल उदास है ( Aaja ki dil udas hai )   ☘️☘️   तुझसे बिछड़ के बहुत दूर हुऐ जा रहें हैं हम तेरे नजदीक आने का कोई रास्ता हो तो बता ☘️☘️ तेरी आंखों की बेसबब तल्खीयों से आहत हूं मेरी रुह को आगोश में लेने का ख्वाब तो सजा ☘️☘️…

  • उठे जब भी कलम

    उठे जब भी कलम ***** लिखेंगे सच सच हम, खाएं सब कसम! लाज साहित्य की बचायेंगे, किसी प्रलोभन में न आयेंगे। न बेचेंगे अपनी कलम, लेखनी से जनांदोलन छेड़ेंगे हम। उठाएंगे बेबस मजदूरों की आवाज, चाहे महिलाओं की मान सम्मान की हो बात। भ्रष्टाचार रूपी दानव को- लेखनी के दम पर हराएंगे, किसानों की बात…

  • क्यूं चाहते हो इतना

    क्यूं चाहते हो इतना     मुझे खूबसूरत पहेली बताता है जो आंखों से नींदे मेरी चुराता है वो   ख्वाबो से हटाकर धूल की परतें रुह को मेरी महकाता है वो   दिन हमेशा खिल जाता है गुलाब सा कांटे सभी दामन से छुडाता है वो   तन्हाईयों की जो लिपटी हुई थी चादरे…

  • मैं अक्सर

    मैं अक्सर   मैं अक्सर गली में बजती तुम्हारी पायल के घुँघरुओं की रुनझुन से समझ लेता हूँ तुम्हारा होना……   बजती है जब-जब सुबह-शाम या दोपहर जगाती है दिल की धड़कन और देखता हूँ झांक कर बार बार दरवाजे से बाहर…….   बहुत बेचैन करती है मुझे छनकती तुम्हारी पायल और खनकती पायल के…

  • किसानों की सुन ले सरकार!

    किसानों की सुन ले सरकार! ******* आए हैं चलकर दिल्ली तेरे द्वार, यूं न कर उनका तिरस्कार; उन्हीं की बदौलत पाते हम आहार। सर्द भरी रातों में सड़कों पर पड़े हैं, तेरी अत्याचारी जल तोप से लड़ रहे हैं। सड़कों के अवरोध हटा आगे बढ़ रहे हैं, शायद कोई इतिहास नया गढ़ रहे हैं। आखिर…

  • नौसेना दिवस ( 04 दिसंबर )

    नौसेना दिवस ( 04 दिसंबर )   भारत मना रहा है आज नौसेना दिवस, अपार शक्ति के आगे शत्रु सहमने को है विवश। नौसेनिक भी जी जान से करते हैं युद्धाभ्यास, समुद्री रास्ते से ना हो आतंकी हमले प्रयास। याद कर रहे हम उन वीरों को- दिया जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान, है आजादी की लड़ाई में…