कविताएँ

  • मृत्यु तुल्य विश्वास | Kavita Mrityu Tulya Vishwas

    मृत्यु तुल्य विश्वास ( Mrityu Tulya Vishwas ) मृत्यु तुल्य विश्वास पड़ा है ,संजीवन पिलवाओ । रजनी के माथे पर कोई ,फिर बिंदिया चमकाओ।। तुम्हीं शिवा राणा लक्ष्मी हो ,और जवाहर गाँधी । तुमने ही मोड़ी थी बढ़कर ,काल चक्र की आँधी । अर्जुन जैसा आज यहाँ पर , तुम गाण्डीव उठाओ ।। मृत्यु तुल्य…

  • मेरा वतन है जग से न्यारा

    मेरा वतन है जग से न्यारा मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।। गंगा, पर्वत झरने, उपवन, हर लेते ये बरबस ही मन, राजा हो या फिर वनवासी, अलग अलग है भाषा भाषी, सूरज चाँद सितारे मिलकर, होने देते कभी भी तम नहीं।। मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं…

  • इश्क़ जुगनू-सा | Ishq Jugnu sa

    इश्क़ जुगनू-सा ( Ishq Jugnu sa ) जीवन के अंधियारे तिमिर में तुम जुगनू की तरह टिमटिमाये पल भर-प्रेम का दीवा जलाकर फिर कुहासा छाये जलते-बुझते जुगनुओं-सा नेह तुम्हारा पलता है ना आता है ना जाता है बस हल्का-सा स्पंदन देता है। जुगनू जैसे– जलता-बुझता वैसा तुम्हारा प्रेम दिखता है और— वैसे ही तुम भी…

  • मेरा जिगर तिरंगा | Mera Jigar Tiranga

    मेरा जिगर तिरंगा ! ( Mera jigar tiranga ) मेरा अमर तिरंगा है, मेरा जिगर तिरंगा है। रग – रग में यही बसता, ऐसा ये तिरंगा है। मेरी आन तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, कोई दुश्मन देखे इसे, दहलाता तिरंगा है। तेरा भी तिरंगा है, मेरा भी तिरंगा है, तू नजर उठा के देख,…

  • हर घर-घर में लगा तिरंगा

    हर घर-घर में लगा तिरंगा हर घर-घर में लगा तिरंगा, डोले अपनी शान में, हर दिल-दिल में बसा तिरंगा, बोले अपने मान में, देखो लाज तुम्हारी हूँ मैं, रखना सदा ये ध्यान में, हर घर-घर में लगा तिरंगा, डोले अपनी शान में, भारत माँ का वसन हूँ मैं, ढँकता उसकी लाज, देशभक्त के साहस का,…

  • देश प्रेम | Kavita Desh Prem

    देश प्रेम ( Desh Prem ) मां, ऐसी मुझे जवानी दे मर जाऊ, इस देश के खातिर, शाम सूबा ये, पानी दे मां ऐसी मुझे जवानी दे । नही चाहिये हल्दी, चंदन, तन को पीला करने को l देना है तो गर्व से मुझको,  तिलक धारा धूल बलिदानी दो l मां ऐसी मुझे जवानी दो…

  • स्त्री योद्धा होती है | Stree Yoddha Hoti hai

    स्त्री योद्धा होती है ( Stree Yoddha Hoti hai ) खून पानी ही नहीं, अपनी रंगत भी देती है, माँ गर्भ धारण कर, खुशी का संगत देती है। नौ महीने का सफर आसान नहीं, हर बच्चे का ओर(गतिविधि) सामान नहीं। एक में करती बहुत उल्टी, तो दूसरे में खाती मिट्टी। चेहरे पर झाई(दाग), पक गये…

  • हमारा देश | Geet Hamara Desh

    हमारा देश ( Hamara Desh ) है प्यार बहुत देश हमारा हिन्दुतान। है संस्कृति इसकी सबसे निराली। कितनी जाती धर्म के, लोग रहते यहाँ पर। सब को स्वत्रंता पूरी है, संविधान के अनुसार।। कितना प्यार देश है हमारा हिंदुस्तान। इसकी रक्षा करनी है आगे तुम सबको।। कितने बलिदानों के बाद मिली है आज़ादी। कितने वीर…

  • गाथाएँ बलिदानों की | Gathayen Balidano ki

    गाथाएँ बलिदानों की ( Gathayen balidano ki ) सुनो सुनाऊँ एक कहानी, मतवाले दीवानों की। प्रबल प्रेरणा स्त्रोत अनूठी, गाथाएँ बलिदानों की।… मंगल बिस्मिल भगत सिंह का, आजादी ही नारा था। नाना शेखर खुदीराम को, देश प्राण से प्यारा था।। हँसकर फाँसी चढ़े भगत जब, वो अनमोल जवानी थी। अंग्रेजों के अतिचारों की, रोकी सब…

  • राखी | Kavita Rakhi

    राखी ( Rakhi ) “धागा” तो इसका कच्चा सा होता है. मगर यह रिश्ता यह पक्का सा जोड़ता है। होता तो है यह कमजोर बहुत ही… सबसे ज्यादा मजबूती यही प्रदान करता है। भाई तो हर बहन का ही मान होता है. कभी दोस्त कभी पिता समान होता है. कभी हँसाता है, तो कभी रुला…