कविताएँ

  • कस्तूरी गंध | Kavita Kasturi Gandh

    कस्तूरी गंध ( Kasturi Gandh ) तुमको क्या मालूम कि, कितना प्यार किया करती हूं। ठोकर खाकर संभल-संभल,कर सदा बढ़ा करती हूं।‌। रुसवा ना हो जाए मोहब्बत की ये, दुनियां हमारी। मिले उमर लंबी इसको ये, दुआ किया करती हूं।। आशाओं के दीप जलाएं ,हृदय अंधेरी कुटिया। बाती बन में जली प्रियतम, सदा तुम्हारी सुधियां।।…

  • नाग पंचमी | Poem Nag Panchami

    नाग पंचमी ( Nag Panchami ) गाय दुग्ध मे नहलाते नागों को नाग लोक मे, जले अग्नि मे महाभारत काल नाग यज्ञ में, रक्षा नागों की ब्राम्हण आस्तिक ने रोंक यज्ञ की, श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन था यही विपुल, भाई बहन की है कथा इसमें बड़ी पावन, हम हर्षाते नागपंचमी कह इसे मनाते, दूं…

  • खुद का विश्वास | Khud ka Vishwas

    खुद का विश्वास ( Khud ka Vishwas ) इस जमाने में लड़ाई स्वयं लड़ना पड़ता है। गैरो के भरोसे तो सिर्फ धोख़ा ही मिलता है। इसलिए भरोसा रखो तुम अपने बाजूओं पर। कामयाबी चूमलेगी निश्चित ही तुम्हारे खुदके कदम।। बड़ा टेड़ा है ये जमाना हाथो से रोटी छीनता है। भुजाओं में है तगाद तो शूरवीर…

  • उम्मीद | Poem Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed ) एक उम्मीद सी,दिल में रहती है । जो प्यार से, हमसे कहती है । चिंताएं सारी ,छोड़ भी दो । खुशियों से , नाता जोड़ ही लो । वो दिन भी, जल्दी आयेगा । मन ,आनंदित हो जायेगा । जब साथ, मिलेगा अपनों का । संग संग देखे , सब सपनों…

  • ज़ख़्म हुए नासूर | Zakhm Hue Nasoor

    ज़ख़्म हुए नासूर ( zakhm hue nasoor ) बिखरी यादें टूटे सपने, क्या तुमको दे पाऊंगी। ज़ख़्म मेरे नासूर हुए हैं, कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी।। हक था तुम्हारा मेरे यौवन की, खिलती फुलवारी पर। पर तुम माली बन न पाए, मैं पतझड़ बन जाऊंगी।। ज़ख्म मेरे नासूर हुएं हैं कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी। मेरी मुस्काने और खुशियां,…

  • जीवन के रंग | Jeevan ke Rang

    जीवन के रंग ( Jeevan ke Rang ) जिंदगी ने जिंदगी से कुछ सवाल किये है। जिंदगी ने जिंदगी को उनके जबाव दिये है। कभी खुशी के लिए कभी गम के लिए। फिर भी जिंदगी को संतुष्ट नही कर पाये।। जिंदगी को जग में सब खुशी से जीना चाहता है। फूलों की चाहत को दिलमें…

  • इंसानियत खो गई | Insaniyat Kho Gayi

    इंसानियत खो गई ( Insaniyat Kho Gayi ) बिछुड़न की रीति में स्वयं को पहचाना भीडतंत्र में बहुत प्रतिभावान हूँ जाना ।।1। नयन कोर बहते रहे शायद कभी सूखे राधा का चोला उतार पार्वती सरीखे ।।2। तुम गए ठीक से, पर सबकुछ ठीक क्यूँ नहीं गई इरादे वादे सारे तेरे गए पर याद क्यूँ नहीं…

  • 78वाँ स्वतंत्रता दिवस | 78th Independence Day

    78वाँ स्वतंत्रता दिवस ( 78th Independence Day ) आजादी पर्व पर चेतन निज घट में रमना हैं । क्या खोया क्या पाया उसका चिन्तन करना हैं । आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥ हमारा अवचेतन मन है ऐसा संग्राहलय । जिसे कहते है सुचिन्तित विचारों का आलय।। आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥…

  • डॉ. राही की कविताएं | Dr. Rahi Hindi Poetry

    हृदि समंदर ! मन के अन्दर ! एक समन्दर ! एक समन्दर ! मन के अन्दर । गहरा – उथला उथला – गहरा तट पे बालू – रेत समन्दर । इच्छाओं की नीलिमा ले मन का है आकाश समन्दर। इसमें सपनों के मोती हैं संघर्षों की प्यास समन्दर। इसके गहरे पानी पैठ अनुभव के हैं…

  • सांवरे की बंसी | Kavita Sanware ki Bansi

    सांवरे की बंसी ( Sanware ki Bansi ) सताने लगी है सांवरे की बंसी, रिझाने लगी है सांवरे की बंसी, मुझे रात औ दिन ख्याल है उसका ही, जगाने लगी है सांवरे की बंसी, कभी गीत गाके सुनाए है बंसी, कभी प्रीत मुझसे जताए है बंसी, मुझे आज कल वो लुभाए है इतना, सभी चैन…