कविताएँ

  • गुरुजी | Kavita Guru Ji

    गुरुजी ( Guru Ji ) ज्ञान का दीप जलाते गुरुजी ज्ञान का प्रकाश बिखराते गुरुजी। अज्ञानता और अशिक्षा के अंधकार से छुटकारा दिलाते गुरुजी। ज्ञानदीप के उजियारे से चहुं ओर उजाला फैलाते गुरुजी। शिक्षा के प्रसार से लोगों को हर तरह से सक्षम बनाते गुरुजी। बिना शिक्षा के जीवन अधूरा लोगों को ये बात बताते…

  • गुरू जीवन | Guru Jeevan

    गुरू जीवन ( Guru Jeevan ) एक गुरू जीवन में मैंने भी है पाया, जिसने हर कदम पर निस्वार्थ मेरा साथ निभाया, जब भी मुझ पर संकट छाया, हर वक्त साथ रहा बनकर हमसाया, बचपन में ही अपना दमखम दिखलाया, फल समझ सूर्य को ही निगल आया, भूत प्रेत को भी खूब भगाया, पवनपुत्र जो…

  • गुरुवर तो अनमोल है | Guruwar to Anmol Hai

    गुरुवर तो अनमोल है ( Guruwar to Anmol Hai ) दूर तिमिर को जो करे, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करे, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पंख…

  • ठगे गए जज्बात | Thage Gaye Jazbaat

    ठगे गए जज्बात ( Thage Gaye Jazbaat ) हो असली इंसान की, कैसे अब पहचान। दोनों नकली हो गए, आंसू और मुस्कान।। कैसा ये बदलाव है, समय है उलझनदार। फसलों से ज्यादा उगे, सौरभ खरपतवार।। सुनता दिल की कौन है, दें खुद पर अब ध्यान। सब दूजों पर जज बनें, सुना रहें फरमान।। कुछ जीते…

  • रोशनी के दिये | Kavita Roshni ke Diye

    रोशनी के दिये ( Roshni ke Diye ) देखा है मैंने ऐसे गुरुओं को भी जो अपने घरों में अंधेरा करके दूसरे घरों में रोशनी फैला देते है और बदले में उन्हें मिलता है – तिरस्कार। सिर्फ साल के एक दिन उन्हें सम्मान में शाल श्रीफल से नवाज दिया जाता है बाकी के तीन सौ…

  • बेशर्मी का रोग | Besharmi ka Rog

    बेशर्मी का रोग ( Besharmi ka rog ) कैकयी संग भरत के, बदल गए अहसास। भाई ही अब चाहता, भाई का वनवास।। सदा समय है खेलता, स्वयं समय का खेल। सौरभ सब बेकार हैं, कोशिशें और मेल।। फोन करें बस काम से, यूं ना पूछे हाल। बोलो कब तक हम रखें, सौरभ उनका ख्याल।। जिन…

  • मायके में | Kavita Mayke Mein

    मायके में ( Mayke Mein ) मौसमों का आना जाना है मायके में सावन से रिश्ता पुराना है मायके से हरियाली तीज पर मायके आती हैं बेटियां सावन के झूलों में झुलाई जाती हैं बेटियां लाड़ जो पीछे छोड़ गई थी आती है वापिस पाने को मां पापा भी जतन करते, बेटी के नाज़ उठाने…

  • लोग क्या कहेंगे | Kavita Log Kya Kahenge

    लोग क्या कहेंगे ( Log Kya Kahenge ) हमें लोग क्या कहेंगे, अब लोगों को भी कहने दो। मतलब की है सारी दुनिया, स्वार्थ में ही रहने दो। तुमको अब बढ़ते जाना, कुछ काम ऐसा कर लो। जीवन में कुछ है पाना, खुशियों से झोली भर लो। साध लो अब निशाना, मंजिल पर तुमको जाना।…

  • रोटी कपड़ा और मकान | Roti Kapada Aur Makaan

    रोटी कपड़ा और मकान ( Roti Kapada Aur Makaan ) उस अमीर आदमी की अकूत दौलत का पहाड़ दो कौड़ी है उस भूख से बिलखते अधनंगे बच्चे की नजर में जिसकी मां ने उससे पहले दम तोड़ दिया उसको जिंदा रखने की चाह में अपना खून चुसवाते चुसवाते अपने भूखे बदन और सूखे स्तन से…

  • मृत्यु | Kavita Mirtyu

    मृत्यु ( Mrtyu ) चाँदनी तारों भरी रात में किसी देवदूत ने छू लिया ज्यूं कोई सितारा आसमां से गोते लगाकर किसी ने ज्यूं उसे हरी धरती की गोद में उतारा कोई विशाल पक्षी ज्यूं ड़़रा रहा हो हवा के रुख को कुछ बादल के टुकड़े ज्यूं छिपा दें सूरज कुछ पल को नजरअंदाज कर…