कविताएँ

  • चौहान शुभांगी मगनसिंह जी की कविताएँ | Chauhan Shubhangi Poetry

    हर युग में चलते चलीं कविता हर युग मेंचलते चलीं कवितालोग क्या कहेंगेयह नहीं सोचतीं कभीहाशिए पर फेंक दिए घटक को प्राथमिक स्थान दिलाती कवितामेघों को अपना दूत बनाकरभावों को व्यक्त करतें कालीदासरामायण के रचयितावाल्मिकीहो या राम के दास तुलसीदासलहर लहर पर लहरातेकामायनी लिखते जयशंकर प्रसादमैं अकेलामैं अकेला…गाते हुए निराले से निरालादुख की बदलीअधूनिक मीरा…

  • स्नेह से प्रेम | Kavita Sneh se Prem

    स्नेह से प्रेम ( Sneh se Prem ) स्नेह से प्रेम जताया जाना उपहार में गुलाब दिया जाना सूर्य का उदय होना यां शिशु का जन्म लेना सब संकेत प्यार को परिभाषित करते हैं गहरा लाल रंग फूलों पर कोमल दिखता है वही लाल रंग आंखों में आकर उग्र होता है मन के भाव और…

  • गुरु ज्ञान की ज्योत | Guru Gyan ki Jyoti

    गुरु ज्ञान की ज्योत ( Guru Gyan ki Jyoti ) हे गुरुवर तू मेरे देश में ज्ञान की ज्योत जगा दे ! बल बुद्धि विद्या वैभव से अंधकार को दूर भगा दे । मोह माया की सुरा को पीकर सोया है जो राष्ट्र छेड़ ज्ञान की तान यहां तू भ्रष्टाचार मिटा दे ।। हे गुरुवर…

  • उबारो गणपति | Ubaro Ganpati

    उबारो गणपति ( Ubaro Ganpati ) हे गणपति बप्पा!गणनायक। विघ्नहर्ता सिद्धि विनायक।। हम तो हैं भक्त प्रभु नादान। आए हैं शरण दयालु जान।। रखिए प्रभु हमारा भी मान। दीजिए हमारी ओर ध्यान।। हमको निहारिए सुखदायक। हे गणपति बप्पा!गणनायक ।। भटक रहे जग की माया में । मैल चढ़ रहा इस काया में ।। अंधकारमय है…

  • हसरत | Kavita Hasrat

    हसरत ( Hasrat ) मेरे दिल की किसी धड़कन में तेरी याद रहती है। कहीं जिंदा हैं वो लम्हे जिन्हें पल पल ये कहती है। चले आओ जरा बैठें हम उसी घाट पे चलके ! जहां की लहरों में अब भी तेरी तसवीर रहती है ।। के मुझको तो गिला कोई नहीं तेरी रुसवाई का…

  • भाव भक्ति के मारे | Bhav Bhakti ke Mare

    भाव भक्ति के मारे  ( Bhav Bhakti ke Mare ) त्रिदेव तुम्हारी महिमा का, रस पीकर मतवारे, घूम रहें हैं गाते महिमा, गली-गली द्वारे-द्वारे, ढोलक झांझ म॔जीरा लेकर, नाचें भजन कीर्तन गाकर, भाव भक्ति के मारे, गली-गली द्वारे-द्वारे, जल नारियल बेलपत्र धतूरा, जिसके बिन अनुष्ठान अधूरा, चलें सभी सामग्री साजे, गली-गली द्वारे-द्वारे, चंद्र नाग डमरू…

  • देव है गुरुदेव | Geet Dev Hai Guru Dev

    देव है गुरुदेव ( Dev Hai Guru Dev ) हे देव गुरुदेव… हे देव गुरुदेव।। जो भी जपे तुमको सुबह और शाम। सुख शांति वो पाये जीवन में अपने। बस मन में अपने श्रध्दा तुम रखो। मानव धर्म का तुम बस निर्वाह करों। जीवन तेरा ये तब निश्चित ही बदलेगा।। हे देव गुरुदेव….। शिष्य पर…

  • समय के लम्हे | Kavita Samay ke Lamhe

    समय के लम्हे ( Samay ke Lamhe ) काश! समय के वो लम्हे फिर से वापस आ जाएं । मुरझाए जो फूल पलाश के फिर से हर्षित हो जाएं।। फिर से हो चुहलबाज़ी उन तिरछी नजरों की। बिन बोले ही कहते जो बातें उन अधरों की। ये चुप्पी साधे होंठ फिर से मंद मंद मुस्काएं…

  • मानवता का कर्तव्य निभाता हूँ!

    मानवता का कर्तव्य निभाता हूँ! सारा जगत अपना ही परिवार है। फिर क्यों जगत को बँटा पाता हूँ। मुझको हर एक प्राणी से प्यार है। प्रभु की हर संतान को हृदय से लगाता हूँ। मैं सदा भूखे को खाना खिलाता हूँ। प्यासों को सदैव, पानी पिलाता हूँ। सेवा ही जीवन, इसी में आनंद है। बस!…

  • स्मृतियाँ | Kavita Smritiyan

    स्मृतियाँ ( Smritiyan ) स्मृतियों के घने बादल फिर से घिरकर आयें हैं सांध्य आकाश में सांध्य बेला में तारे छिप रहें हैं कभी तों कभी झिलमिला रहें हैं स्मृतियों के घने बादल फिर से घिर रहें हैं घनघोर होगीं फिर वर्षा आसार नजर आ रहें हैं पग चिन्ह हैं तुम्हारे जानें के जो लौटकर…