ग़ज़ल

  • अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं

    अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं अश्क़ भी वो गिराने लगते हैंदूर जब भी हम जाने लगते हैं बातों में मुस्कराने लगते हैंहम उन्हीं के दीवाने लगते हैं जब कभी मिलते हैं सनम मुझसेतो अदा से रिझाने लगते हैं बात जिस दिन भी हो जाये उनसेदिन वही बस सुहाने लगते हैं याद आती है जब…

  • एक सखी नेक सखी चाहिये

    एक सखी नेक सखी चाहिये एक सखी नेक सखी चाहियेव्यस्त व मदमस्त सखी चाहिये पेश सदा प्रेम से आये तथाकर्म से आदर्श सखी चाहिये सर्व गुणों से न हो संपन्न परमन से जो हो श्रेष्ठ सखी चाहिये फल से पेड़ सी समृद्ध औ’नम्र व प्रेमाळ सखी चाहिये धीर व गंभीर चरित्रवान औ’शांत व गुणवान सखी…

  • क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद

    क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद।जब मसीह़ा है हमारा मोजूद। वो ही रहता है हमेशा दिल में।अ़क्स आंखों में है उसका मोजूद। दिन भी दिन सा न लगेगा यारो।दिल में जब तक है अंधेरा मोजूद। इश्क़ ज़िन्दा है जहां में जब तक।हुस्न तब तक है जहां का मोजूद। जिससे…

  • इरादा डिगा नहीं सकता

    इरादा डिगा नहीं सकता हवा का ज़ोर इरादा डिगा नहीं सकताचराग़े-ज़ीस्त हूँ कोई बुझा नहीं सकताहुस्ने-मतला– किसी के सामने सर को झुका नहीं सकतावजूद अपना यक़ीनन मिटा नहीं सकता फ़कत तुम्हारी ही मूरत समाई है दिल मेंइसे मैं चीर के सीना दिखा नहीं सकता किसी के प्यार से जान-ओ-जिगर महकते हैंयक़ीन उसको ही लेकिन दिला…

  • रक्खा गया | Rakkha Gaya

    रक्खा गया ( Rakkha Gaya ) इश्क़ का इक सिलसिला रक्खा गयाज़ख़्म दे उसको हरा रक्खा गया साज़िशों से वास्ता रक्खा गयाअपना केवल फ़ायदा रक्खा गया कौन पहचानेगा तुमको फिर यहाँजब न तुमसे राब्ता रक्खा गया फिर किसी घर में न हों दुश्वारियाँदूर घर से मयकदा रक्खा गया वो बहुत मग़रूर हम मजबूर थेदर्मियाँ इक…

  • जाने क्यों बेख़बर नहीं आती

    जाने क्यों बेख़बर नहीं आती जाने क्यों बेख़बर नहीं आतीढ़ाने मुझपर कहर नहीं आती ताकते क्यों हो तुम गली उसकीआजकल वो नजर नहीं आती मैं हूँ मजबूर आज जीने कोयाद वह इस कदर नहीं आती देखकर हार बैठा दिल जिसकोवो भी लेने ख़बर नहीं आती तू उसे खोजता है क्यों दर दरवो कभी इस डगर…

  • तिश्नगी हमारी | Tishnagi Hamari

    तिश्नगी हमारी ( Tishnagi Hamari ) कुछ तिश्नगी हमारी भी बुझवाइए ज़रा।इक जाम मस्त आंखों से पिलवाइए ज़रा। क्या-क्या शिकायतें हैं पता तो चले हमें।उनको हमारे पास तो बुलवाइए ज़रा। शेअ़रो सुख़न में आपके चर्चे हैं हर तरफ़।कोई ग़ज़ल हमें भी तो सुनवाइए ज़रा। कर देना क़त्ल शौक़ से अरमाने नो-ब-नो।दामन से पहले दाग़ तो…

  • तुम्हारा नाम | Tumhara Naam

    तुम्हारा नाम ( Tumhara Naam ) न याद-ए-आब-जू आए न याद-ए-आबशार आए।तुम्हारा नाम ही लब पर हमारे बार-बार आए। रहें होश-ओ-हवास़ अपने सलामत उस घड़ी या रब।हमारे सामने जिस दम जमाल-ए-ह़ुस्ने-यार आए। अभी दौर-ए-ख़िजां है तुम अभी से क्यों परेशां हो।सजा लेना नशेमन को गुलों पर जब निखार आए। सजा रक्खी है जिसके वास्ते यह…

  • ग़ज़ल गुनगुना दीजिए

    ग़ज़ल गुनगुना दीजिए साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिएशामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँनाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हमसाक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिलफ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए कर रही हैं बहारें…

  • परिवार अपना | Parivaar Apna

    परिवार अपना ( Parivaar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…