इरादा आप का

इरादा आप का | Irada Aapka

इरादा आप का

( Irada Aapka )

अब इरादा आप का सरकार क्या है
इस कहानी में मिरा किरदार क्या है।

चंद सिक्कों में अना बिकती यहां पर
और तुम कहते हो की बाज़ार क्या है।

दोस्त चारागर दवा जो दे रहा तू
ज़हर की उसमें बता मिक़दार क्या है।

पैरवी वो मुद्दई ही कर रहा जब
देखना है फ़ैसला इस बार क्या है।

जंग जब रिश्तों में ही छिड़ने लगे तो
जीतना क्या और इसमें हार क्या है।

रूह की तस्कीन थे जिनकी कभी हम
आज कहते आपकी दरकार क्या है।

कैफ़ियत उनको पता दिल की नयन सब
तब भला इक़रार क्या इंकार क्या है।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

किरदार – चरित्र रोल
अना – खुद्दारी
चारागर – डाक्टर
मिकदार – मात्रा
मुद्दई – विरोधी
तस्कीन – संतुष्टी
कैफ़ियत- हालत

यह भी पढ़ें :-

है डर क्या | Ghazal Hai Dar Kya

Similar Posts

  • अपनों ने मुझको रुलाया बहुत है | Rulaya Bahut hai

    अपनों ने मुझको रुलाया बहुत है ( Apno ne mujhko rulaya bahut hai )   वफ़ा से ही रिश्ता निभाया बहुत है किसी को यूं अपना बनाया बहुत है जो तकलीफ दिल को बहुत हो रही अब किसी से यहाँ दिल लगाया बहुत है वही मेरे ऊपर हंसा है यहाँ तो जिसे हाल दिल का…

  • उसी के दिल में | तरही ग़ज़ल

    उसी के दिल में ( Usi ke dil me ) उसी के दिल में बसी मेरी जान थोड़ी है अकेली मुझपे वही मेहरबान थोड़ी है हँसी-मज़ाक है , वो बदज़बान थोड़ी है कि मुझसा उसका कोई क़द्रदान थोड़ी है सभी ने हुस्न की मलिका उसे कहा है यहाँ हमारा एक ये तन्हा बयान थोड़ी है…

  • कर दे जो दूर ग़म

    कर दे जो दूर ग़म कर दे जो दूर ग़म को किसी में हुनर नहींयारब क्या ग़म की रात की होगी सहर नहीं तड़पे जिगर है मेरा ये उनको ख़बर नहींये आग इश्क़ की लगी शायद उधर नहीं घर से निकलना आज तो मुश्किल सा हो गयामहफ़ूज नफ़रतों से कोई रहगुज़र नहीं चलती है चाल…

  • क्यूं है | Kyon Hai

    क्यूं है ( Kyon Hai ) जिस शख़्स से गिला है उससे ही प्यार क्यूं हैमुझको उसी बशर का अब इंतज़ार क्यूं है उसके बगैर सूनी लगती है दुनिया मुझकोहोता उसी से मेरा दिल खुशगवार क्यूं है जिसने कभी तो कोई वादा नहीं निभायानादान दिल को उस पर फिर ऐतबार क्यूं है खोयी रहूं सदा…

  • जब भी कोई कहीं बिखरता है

    जब भी कोई कहीं बिखरता है जब भी कोई कहीं बिखरता हैअक़्स माज़ी का खुद उभरता है क्यूँ रखूँ ठीक हूलिया अपनाकौन मेरे लिए संवरता है चाहतें कब छिपी ज़माने मेंक़ल्ब आँखों में आ उतरता है वस्ल में हाले-दिल हुआ ऐसापेड़ झर झर के जब लहरता है बात कर लेना हल नहीं लेकिनजी में कुछ…

  • मुहब्बत न जाने | Muhabbat na Jaane

    मुहब्बत न जाने ( Muhabbat na jaane )    करेगा मुहब्बत शराफत न जाने परस्तिश इबादत अकीदत न जाने। मिरा दिल चुराया उसी आदमी की चली क्यूं सदा बादशाहत न जाने। किया नाम दिल है उसी के मगर क्यूं वही एक अपनी वसीयत न जाने। नज़र आ गया ईद का चांद लेकिन दिखे कब तलक…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *