कौन देता सहारा किसी को
कौन देता सहारा किसी को कौन देता सहारा किसी कोलोग जीते हैं अपनी ख़ुशी को रश्क करने लगे तुझ से दुनियाइतना रंगीन कर ज़िन्दगी को इक मुसाफ़िर ने दिल में उतर करदिल से बाहर किया है सभी को मिन्नतें कर के तौबा भी कर लीछोड़िए आप अब बरहमी को झुक गये वक़्त के फ़ैसले पररोते…










