ग़ज़ल

  • प्यार नीलाम हुआ | Ghazal Pyar Neelam Hua

    प्यार नीलाम हुआ ( Pyar Neelam Hua )   प्यार नीलाम हुआ अक्ल के दानाई में जीत का जश्न मनाता है वो हाराई में II चाल पे चाल चला शर्म निगाहों से गुम आज हम चौक गए सोच के तन्हाई में II यक-ब-यक तोड़ रहा आज मरासिम जो वो बेअसर वक्त भी होगा कभी भरपाई…

  • जब इश्क का फूल खिलता है

    जब इश्क का फूल खिलता है   दिल के गुलशन जब इश्क का फूल खिलता है, बदन का अंग-अंग, रोम-रोम हिलने लगता है ! भटकता जब मन बैचेन होकर इधर उधर तब, महबूब की बांहो में जन्नत का सुकून मिलता है ! मुहब्बत की दुनिया के जलवे ही होते है निराले, इसकी आग में दिन…

  • अक्ल नहीं है | Ghazal Akal Nahi Hai

    अक्ल नहीं है (Akal Nahi Hai )   अक्ल नहीं है उस जाहिल में खोया दिल उसका ग़ाफ़िल में रब टाल मुसीबत सर पे है जा है मेरी तो मुश्किल में बात छुपा न सनम तू कोई बोल ज़रा जो तेरे दिल में यादों की फुवारे आती है मोज़े उठती जो साहिल में सारे आये…

  • मैं खूबसूरत नहीं | Ghazal Main Khubsurat Nahi

    मैं खूबसूरत नहीं  ( Main Khubsurat Nahi )   कोई मुझे पसंद करे इतना मैं खूबसूरत नहीं ! देखता यहां कोई ज़माने में भली मूरत नहीं ! गोरी घनी सूरत के सब कायल रहे होते सदा, मेरी ज़माने को यहां, कोई जरुरत ही नहीं ! होते वो किस्मत के धनी जिन्हे मिले कोई परी, कोई…

  • बिखर न जाऊँ | Ghazal Bikhar na Jaoon

    बिखर न जाऊँ ( Bikhar na Jaun )   तेरा फ़िराक़ है इक मौजे जाँसितां की तरह बिखर न जाऊँ कहीं गर्दे-कारवां की तरह न डस लें मुझको ये तारीक़ियाँ ये सन्नाटे उजाला बन के चले आओ कहकशां की तरह मेरे फ़साने में रंगीनियां ही हैं इतनी सुना रहे हैं इसे लोग दास्तां की तरह…

  • सादगी | Ghazal Saadgi

    सादगी ( Saadgi )   अब नुमाइश की हुकूमत और हारी सादगी हम को तो हर तौर ले डूबी हमारी सादगी। रंग से खुशबू धनक से फूल जुगनू चांद से दो जहां से ख़ूबसूरत है तुम्हारी सादगी। शख़्स था सादा बहुत वो क्या मगर उसको हुआ जाने उसने छोड़ दी क्यों अपनी सारी सादगी। बज़्म…

  • जाये यारो | Ghazal Jaye Yaro

    जाये यारो ( Jaye Yaro ) दिल की सरगोशी मिरी मुझको डराये यारो। हद कि बस याद वही याद क्यूं आये यारो। मुस्तकिल कह दो रहे उससे वो दिल में मेरे और जाना है तो फिर जल्द ही जाये यारो। मुझको मंजूर सज़ा जो वो मुक़र्रर कर दे शर्त बस ये की ख़ता मेरी बताये…

  • अरमान बाकी है | Armaan Baki Hai

    अरमान बाकी है ( Armaan Baki Hai )   इक अरसे जो तेरे बगैर चली वो साँस काफी है, बिछड़ कर भी तू मेरा रहा ये एहसास काफी है, सब पूछते हैं कैसे सफ़र किया तन्हा, मैंने कहा ज़िंदा रहने केलिए आख़िरी मुलाकात काफी है, तेरे ख़्याल से ही रौशन रहीं मेरी तन्हाईयाँ सदा, तुझे…

  • सोच बदलना होगा | Soch Badalna Hoga

    सोच बदलना होगा ( Soch Badalna Hoga )   गर समन्दर में रहना है तो तैरना सीखना होगा… मौजों से खेलना है अगर तो उनसा बनना होगा….. पुरानी सोच और सतही तरीके को बदलना होगा…. अब नये तरीकों पर हाथ आज़माना होगा….. काग़ज़ वही रहेगा क़लम भी वही होगा, लफ़्ज़ों का चुनाव मगर बदलना होगा,…

  • मेरे शहर की नदी जो धार्मिक हो गई | Ghazal Mere Shehar ki

    मेरे शहर की नदी जो धार्मिक हो गई ( Mere Shehar ki Nadi jo Dharmik Ho Gai )    प्यास की कहानी और मार्मिक हो गई, मेरे शहर की नदी जो धार्मिक हो गई। फरेब भी निठल्ली नहीं है आजकल, वो सियासत के महल में कार्मिक हो गई। चेहरे की रंगत तो बदली नहीं अभी…